Big Bhoj on Akshaya Tritiya: 200 बोरी आटा, 25 बोरी शक्क, 20 बोरी बेसन और 400 पीपे घी-तेल से 50 हजार लोगों का खाना तैयार हो रहा है. इस बड़े भोज को बनाने में करीब 70 महिला-पुरुष कारीगर जुटे हैं. भोज के लिए लड्डू तैयार हो चुका है. बड़े से मैदान में टेंट लगाकर पूरे आयोजन की तैयारी की जा रही है. इस बड़े भोज की रसोई 5 दिन पहले से पकवान तैयार कर रही है. 10 मई को अक्षय तृतीया के दिन 80 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह में करीब 50 हजार लोगों को खाना खिलाने की व्यवस्था की गई है. यह तैयारी राजस्थान के टोंक जिले में की गई है. जहां शुक्रवार को अक्षय तृतीया के दिन माली समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन होना है.
उल्लेखनीय हो कि राजस्थान अपने विभिन्न रंगों और वेशभूषा के साथ परंपराओं और आयोजन के लिए पहचाना जाता है. इसी कड़ी में सामूहिक विवाह सम्मेलन गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान जैसा है. जिनके बच्चे बेटियां ऐसे आयोजनों में विवाह के बंधन में बनते हैं, इससे न सिर्फ आयोजनों पर होने वाला खर्च बचता है बल्कि किसी भी समाज की एकजुटता और ताकत का अहसास भी ऐसे सम्मेलनों में देखा जा सकता है.
टोंक के सोलनपुरा में हो रहा माली समाज का बड़ा आयोजन
राजस्थान के टोंक जिला मुख्यालय पर सोलनपुरा में आयोजित होने वाले माली समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में समाज के 79 जोड़े विवाह के बंधन में अक्षर तृतीया के अवसर पर बधेंगे. इसके लिए टोंक में इन दोनों 50000 लोगों के लिए बनने वाले भोजन की तैयारी जोरों पर है.
माली समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन के अध्यक्ष सहित भोजन व्यवस्था को देख रहे हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सामूहिक विवाह सम्मेलन में हमें 50 हजार लोगों के आने की उम्मीद है. इसके लिए हमने कच्ची सामग्री में 200 क्विंटल आटा, 400 पीपे तेल और घी के, 25 बोरी शक्कर के साथ ही 25 क्विंटल बेसन सहित अन्य सामग्रियां स्टॉक में रखी हुई है.
भीषण गर्मी में भी पूरे उत्साह से हो रहा आयोजन
लड्डू ,नमकीन पूरी दाल की रसोई को बनाने के लिए अलग-अलग भट्टियों पर महिला और पुरुष कारीगर अपने काम में लगे हैं. लगभग 60 से 70 कारीगर जिनमें महिला पुरुष दोनों शामिल है इस रसोई को बनाने में जुटे हुए हैं. भीषण गर्मी में इतने लोगों के लिए भोजन बनाना और ऊपर से आसमान से बरसती आग के साथ ही भट्टियों के पास रहकर रसोई का इंतजाम करना किसी चुनौती से कम नहीं है. हालांकि आयोजन में जुटे लोग गर्मी के बावजूद पूरे उत्साह से लगे हैं.
युवा-बुर्जुग सभी ने तय की अपनी-अपनी जिम्मेदारी
माली समाज के युवाओं बुजुर्गों ने अपनी-अपनी जिम्मेदारियां तय कर ली है. वह चाहते हैं कि ट्रैफिक व्यवस्था से लेकर भोजन व्यवस्था और सामूहिक विवाह सम्मेलन की सभी व्यवस्थाएं नियमों के तहत संचालित हो और यहां आने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी तरह की दिक्कत ना हो.
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