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अलवर में सरकारी स्कूल के टीचर ने लगाई फांसी, चार पन्‍नों का सुसाइड नोट म‍िला 

टीचर ने काम का दबाव और स्कूल स्टाफ पर मानसिक उत्पीड़न का आरो लगाया. सुसाइड नोट में पूरा जिक्र किया है.

अलवर में सरकारी स्कूल के टीचर ने लगाई फांसी, चार पन्‍नों का सुसाइड नोट म‍िला 
अलवर में सरकारी स्कूल के टीचर ने सुसाइड कर लिया.

अलवर जिले के निर्भयपुरा गांव में रविवार को सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. पुलिस ने यह जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान बद्दन लाल के रूप में हुई है. वे पिछले 25 वर्षों से सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, ढेलावास में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और पांच महीने बाद सेवानिवृत्त होने वाले थे. उनका शव घर से लगभग 100 मीटर दूर एक पशु बाड़े में बने टिन शेड में फंदे से लटका मिला. 

पुलिस ने केस दर्ज किया 

अकबरपुर थाना प्रभारी सीमा सिंसिनवार ने बताया कि शव को अलवर जिला अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया है. उन्होंने कहा कि परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है. 

चार पन्नों का सुसाइड नोट मिला 

पुलिस ने बताया कि घटनास्थल से चार पन्नों का एक सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें शिक्षक ने लंबे समय से चली आ रही बीमारी, काम का भारी दबाव, परीक्षाओं और पंचायत चुनावों से जुड़ा दबाव, तथा स्कूल के अन्य कर्मियों के असहयोगात्मक रवैये और मानसिक उत्पीड़न का जिक्र है. थाना प्रभारी ने बताया कि सुसाइड नोट और अन्य साक्ष्यों को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है. 

टीचर की सुसाइड नोट में लिखी बात... 

मैं बड्‌डन लाल भलाई पुत्र भोरे लाल जी, निर्भमपुरा, अकबरपुर पंचायत समिति मालाखेड़ा, तहसील मालाखेड़ा, जिला अलवर, राजस्थान का निवासी हूं.  मैं वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय ढेहलावास, पंचायत समिति उमरेड, जिला अलवर, राजस्थान में अध्यापक पद पर 25 साल से कार्यरत हूं.  मेरी राजकीय सेवा लगभग 38 वर्ष होने को है.  मेरी सेवानिवृत्ति 5 महीने बाद 30 जून 2026 को होने वाली थी.

मैं चार-पांच वर्ष से मानसिक, बौद्धिक एवं शारीरिक हालात से पीड़ित हूं.  आज से 4-5 वर्ष पूर्व मेरे बड़े बेटे की शादी थी.  शादी से दो दिन पूर्व जबरदस्त माइंड स्ट्रोक आया था, तथा शरीर के आधे हिस्से में पैरालाइज हो गया था, तथा मुंह टेढ़ा हो गया था. आंखों की रोशनी भी बहुत कम हो गई थी. मुझे चलने में कमरे के दरवाजे तक का भी पता नहीं था.

दो दिन बाद बेटे की शादी थी 

घर पर दो दिन बाद बेटे की शादी थी.  ऐसी स्थिति में शादी से दो दिन पूर्व मुझे गांव के चार-पांच व्यक्ति एवं मेरा छोटा भाई और मेरे बड़े भाई का लड़का अलवर लेकर गए,  वहां पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर अभिषेक गोयल को दिखाया.  50 से 60 हजार रुपये की जांच एवं दवाइयां दी गईं.  मुझे तो होश नहीं था. मेरे छोटे भाई को बताया कि स्थिति गंभीर है, कुछ भी हो सकता है. 

शादी थी, इसलिए दवाइयां लेकर मुझे घर पर ले आए. वहां पर इलाज शुरू किया. मेरे बेटे की बारात में भी नहीं जा सका. मेरा बेटा दूल्हा बनकर बारात में रोता ही चला गया. मुझे कोई होश नहीं था. मेरे पास मेरे रिश्तेदार, जो स्थानीय कंपाउंडर थे, और एक रिश्तेदार जो एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर में कंपाउंडर थे, उन्होंने मेरी देखरेख के लिए घर पर मेरे पास छोड़ दिया.

बारात लौटने के बाद डॉक्टर पंकज शर्मा न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाया, उससे कोई आराम नहीं मिला. इसके बाद मुझे जयपुर लेकर गए. वहां पर मुझे एसएमएस हॉस्पिटल की डॉक्टर भावना शर्मा (न्यूरोलॉजी) को दिखाया. उन्होंने गंभीर स्थिति बताई. उन्होंने कहा कि पेशेंट की स्थिति खराब है, पागल भी हो सकता है, नस भी फट सकती है, बौद्धिक स्थिति कमजोर रहेगी, अधिक सुधार नहीं हो सकता, दवाइयां पूरे जीवन लेनी होंगी.

"मेरी सुनने वाला कोई भी नहीं है..."

मेरी उम्र 60 वर्ष होने को है. मुझे कुछ भी समझ नहीं आता है कि क्या करना है, कैसे करना है, पता नहीं लग पाता है. अब जांच करवाई तो जांच में 30 परसेंट सुधार बताया है.  मेरे कुछ भी समझ में नहीं आता. मेरे पास 600 HPL अवकाश है.  मेरी सेवानिवृत्ति से पूर्व 115 दिन वर्किंग डे हैं, वह भी नहीं ले पा रहा हूं. मैं गंभीर स्थिति से गुजर रहा हूं. मेरी सुनने वाला कोई भी नहीं है. मेरे तीन बेटे हैं, पढ़े-लिखे हैं, नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. मेरे परिवार में 11 सदस्य हैं, इसलिए मैं अनिवार्य सेवानिवृत्ति भी नहीं ले पाया, क्योंकि इस समय वे सभी मेरे पर आश्रित हैं.

प्रधानाचार्य सुनीता बाई, उसके बाद प्रधानाचार्य गायत्री जी, उसके बाद प्रधानाचार्य एके मिश्रा जी से मैंने अनुरोध किया कि मेरी मानसिक स्थिति बहुत खराब है, और मेरी 30 जून 2026 को सेवानिवृत्ति भी है.  मेरा कार्यभार किसी भी अध्यापक को दिलवा दो, पर मेरी सुनने वाला कोई नहीं है. मेरे पास निशुल्क पाठ्य पुस्तकों का PEEO ढेहलावास नोडल के 8 विद्यालयों का कार्यभार है, तथा स्वयं के विद्यालय के कक्षा 1 से 12 तक का चार्ज है.  इसी प्रकार वर्क बुक एवं लाइब्रेरी का चार्ज भी PEEO नोडल के आठ विद्यालयों का एवं स्वयं के विद्यालय का चार्ज भी मेरे पास है.  इस चार्ज को कोई लेने को तैयार नहीं है. 

"मैं अत्यंत बुरी स्थिति से गुजर रहा था"

मैं अत्यंत बुरी स्थिति से गुजर रहा था. फरवरी 2026 में कक्षा 5, 10, 12 का बोर्ड एग्जाम है, तथा मार्च 2026 में कक्षा 1, 2, 3, 4, 6, 7, 9, 11 की परीक्षाएं हैं. अप्रैल 2026 में पंचायत चुनाव है, तथा 2026 में जनगणना है.  मैं चार्ज कब देता और रिटायरमेंट के कागज कब तैयार करता. मैं बहुत बुरी स्थिति से गुजर रहा था, जो मानसिक हालत में थोड़ा-बहुत सुधार था, वह भी नहीं रहा.  सोच-सोचकर रात की नींद नहीं आ रही थी. मेरा खाना-पीना छूट गया था.  मैं अत्यंत दुखी हो गया था, तथा मुझे प्रताड़ित भी किया जाता था.  कहते थे यह कार्य आप कैसे भी करो, हमें पता नहीं, आप जानो आपका काम जाने.  मेरा मजाक भी उड़ाया जाता था. 

निशुल्क पाठ्यपुस्तक, वर्क बुक, लाइब्रेरी बुक लाने में सत्र 2025-26 में स्वयं के पैसे खर्च कर 20 चक्कर लगाए.  इतने दिन इन सामग्री को अधीनस्थ विद्यालयों एवं स्वयं के विद्यालयों में बांटने में लगे. कक्षा 1 से 5 में अध्यापन कराने वाला कोई नहीं था.  केवल एक अध्यापिका सीमा गुप्ता थीं, उनके बच्चों से कोई लेना-देना नहीं था.  कोई बच्चा विद्यालय आए या न आए, उपस्थिति भी दर्ज नहीं कर पाती थीं. 

मैंने अपने चार्ज के बारे में प्रधानाचार्य सुनीता बाई से भी अनुरोध किया कि मैडम मेरी मानसिक हालत खराब है, और मेरा रिटायरमेंट भी है, किसी भी कार्मिक को मेरा चार्ज दिलवा दो.  मेरी कुछ भी नहीं सुनी और कहा क‍ि कैसे भी करो, मैं किसी से नहीं कहती, आप जानो आपका काम जाने, ट्रांसफर कराकर चली जाऊंगी, आने वाला जाने. 

अक्टूबर 2025 में प्रधानाचार्य गायत्री जी से अनुरोध किया.  उन्होंने कहा क‍ि मैं तो जल्दी में प्रमोशन लेकर चली जाऊंगी, आने वाला है. सीमा गुप्ता को सत्र 2024-25 के रिजल्ट की कोई परवाह नहीं थी.  रिजल्ट बनाया भी नहीं.  कहती क‍ि मुझे कोई परवाह नहीं, अनिल जी जाने उसका काम जाने.  कहती क‍ि आज मैं जाऊं भाड़ में निकले, मुझे कोई परवाह नहीं, मेरी जानकारी और पावर ऊंची हैं.


सत्र 2024-25 में कक्षा 1 के अध्यापक प्रत्येकेंद्र सिंह एवं कक्षा 5 के अध्यापक रोशन लाल ने रिजल्ट बनाना जरूरी नहीं समझा. मैंने उनसे कह क‍ि भाई ऑनलाइन तो मैं कर दूंगा. जबकि इन कक्षाओं के क्लास टीचर वही थे और परीक्षा प्रभारी भी वही थे. उन्होंने कहा क‍ि हम कुछ भी नहीं करेंगे, हमारी जानकारी और पहुंच ऊंची है.  शराब पीकर गाली-गलौज में अपशब्दों का प्रयोग किया.  कहा—हमारी कलेक्ट्रेट और शिक्षा विभाग में पहुंच बहुत ऊंची है.  हमारे ताई लगा देंगे, तेरी नौकरी खा जाएंगे, रिटायरमेंट नहीं लेने देंगे.

कहा क‍ि तुम दोनों बहुत खतरनाक आदमी हो,  जब परीक्षा प्रभारी अनिल कुमार एवं प्रधानाचार्य कुछ नहीं कह रहे तो तू क्यों याद दिलवाता है. ऐसा ही जवाब सीमा गुप्ता अध्यापिका ने दिया.  मैं चुप हो गया. अनिल कुमार परीक्षा प्रभारी ने मुझे परीक्षा फल लाकर नहीं दिया. मैंने कक्षा 3 की ऑनलाइन मार्कशीट निकलवाकर उन्हें बाइंडिंग कर अनिल कुमार परीक्षा प्रभारी को विद्यालय में आने पर जमा करवा दी.

इन सब के बारे में मौजूद प्रिंसिपल सुनीता बाई को अवगत कराया तो उन्होंने जवाब दिया क‍ि मैं इन शराबी बदतमीज लोगों से बात नहीं करूंगी, ये कुछ भी करें. 

आखिरी में उन्होंने लिखा...

मैं ऐसी स्थिति में अवकाश भी नहीं ले पा रहा था. प्राथमिक कक्षा को अध्यापन कराने वाला कोई नहीं था. न बच्चों का रिजल्ट बनाने वाला, न कोई मेरी मदद करने वाला, न कोई मेरा चार्ज लेने वाला. मैं रिटायरमेंट के कागज बनवाने के लिए भी छुट्टी नहीं ले पा रहा था. 

माइंड स्ट्रोक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था. कुछ समझ नहीं आ रहा था. मेरे पास चिंतन-मनन करने की भी क्षमता नहीं बची थी. मैं ईश्वर से परमपिता परमात्मा से यही अनुरोध करता हूं कि उन दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और शिक्षा विभाग भी इन दोषी लोगों पर कार्रवाई करे, जिन्होंने मुझे आत्महत्या करने को मजबूर किया.

यह मेरा अंतिम अनुरोध है.  मैं इन सारी परिस्थितियों से जूझकर आत्महत्या करने को मजबूर हुआ हूं. मेरे छोटे भाई मामचंद, बड़े भाई का लड़का सुरेंद्र कुमार, मेरे तीनों बेटे, तीनों पुत्रवधुएं, मेरी प्यारी-सी सभी पोतियां एवं मेरी धर्मपत्नी संतोष देवी को बहुत-बहुत प्यार और मेरा अंतिम प्रणाम. जो मैंने इन परिस्थितियों में कदम उठाया है, मुझे माफ करना.  

सभी ग्रामवासियों को मेरा अंतिम राम-राम जी. 

"शिक्षक मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे"

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दहलवास के प्रिंसिपल अवनीश मिश्रा ने बताया कि हाल ही डेढ़ माह पूर्व उन्होंने ज्वाइन किया है, और शिक्षक बड्‌डन लाल के पास निशुल्क पाठ्य पुस्तक ओर लाइब्रेरी का चार्ज था, जिसे वह बड़ी जिम्मेदारी से करते थे. शिक्षक बड्‌डन लाल का स्वास्थ्य खराब था, और वह मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे. जिनका जयपुर से इलाज चल रहा था. कई बार बाकी शिक्षकों ओर मेरे द्वारा उनसे छुट्टी लेने को कहा गया पर वह छुट्टी नहीं लेते थे, और काम के प्रति सजग रहते थे.  पूर्व ने भी स्कूल में किसी तरह की कोई विवाद नहीं था. 

जिस महिला प्रिंसिपल का सुसाइड नोट में जिक्र किया. उनका पहले ही स्कूल से ट्रांसफर हो चुका है.  

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