Rajasthan Antibiotic Medicine: एंटीबायोटिक दवा की खपत को लेकर पूरे देश में चर्चा हो रही है. क्योंकि लगातार एंटीबायोटिक की खपत चिंता का विषय बन रहा है. वहीं राजस्थान में एंटीबायोटिक के खपत के आंकड़े चौंकाने वाले है. राजस्थान में बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेने की बढ़ती प्रवृत्ति अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है. ताजा सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में हर साल करीब 2 हजार करोड़ रुपए की एंटीबायोटिक दवाओं की खपत हो रही है, जिसमें से लगभग 1500 करोड़ रुपए की दवाएं बिना किसी प्रिस्क्रिप्शन के बिक रही हैं.
बताया जा रहा है कि मेडिकल स्टोर्स पर होने वाले कुल दवा कारोबार का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा केवल एंटीबायोटिक पर खर्च हो रहा है.
प्रदेश में 282 तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल
प्रदेश में इस समय 282 तरह की एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल हो रहा है और इनका उपभोग लगातार बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दी, खांसी, बुखार जैसी छोटी समस्याओं में भी एंटीबायोटिक का उपयोग आम हो गया है, जबकि अधिकांश मामलों में इसकी आवश्यकता ही नहीं होती. डॉक्टरों की सलाह के बिना ली जा रही ये दवाएं बैक्टीरिया को दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बना रही हैं, जिससे इलाज धीरे-धीरे असरहीन होता जा रहा है.

60 प्रतिशत मामलों में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं
चिकित्सक डॉ. पंकज आनंद के अनुसार अस्पतालों में भर्ती बच्चों को भी कई मामलों में हाई डोज एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड दिए जा रहे हैं. उनका कहना है कि करीब 60 प्रतिशत मामलों में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती, लेकिन गलत सलाह और आदत के कारण मरीज इन्हें लगातार लेते रहते हैं.
नियमों के बावजूद मेडिकल स्टोर्स पर बिना डॉक्टर की पर्ची के एंटीबायोटिक दवाएं आसानी से मिल रही हैं. ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्थिति और ज्यादा चिंताजनक है.
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