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Rajasthan: सोने-चांदी की बढ़ती चमक से आयुर्वेद का इलाज हुआ महंगा, दवाएं हुईं इतनी महंगी कि मरीजों ने फेरा मुंह

भरतपुर में सोने और चांदी के बढ़ते दामों का सीधा असर आयुर्वेद की  दवाओं पर दिख रहा है. स्वर्ण और रजत भस्म जैसी कीमती धातुओं से बनने वाली दवाएं इतनी महंगी हो चुकी हैं कि मध्यमवर्गीय मरीजों की पहुंच से बाहर हो गई हैं.

Rajasthan: सोने-चांदी की बढ़ती चमक से आयुर्वेद का इलाज हुआ महंगा, दवाएं हुईं इतनी महंगी कि मरीजों ने फेरा मुंह
आयुर्वेदिक दवाओं पर सोने चांदी की बढ़ती कीमत का प्रभाव
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Ayurveda Medicine Price Hike: देश में सोने-चांदी की कीमतों में आई बेतहाशा तेजी ने न केवल दुल्हनों के श्रृंगार को फीका किया है, बल्कि अब यह आम आदमी की सेहत पर भी भारी पड़ रही है. राजस्थान के भरतपुर में सोने और चांदी के बढ़ते दामों का सीधा असर आयुर्वेद की  दवाओं पर दिख रहा है. स्वर्ण और रजत भस्म जैसी कीमती धातुओं से बनने वाली दवाएं इतनी महंगी हो चुकी हैं कि मध्यमवर्गीय मरीजों की पहुंच से बाहर हो गई हैं. आलम यह है कि अस्पताल पहुंचने वाले मरीज अब खुद डॉक्टरों से उन्हें भस्म वाली महंगी दवाएं न लिखने की बात कह रहे है क्योंकि उन्हें खरीद पाना अब उनके बस की बात नहीं रही.

महंगी भस्मों ने बिगाड़ा आयुर्वेद का इलाज

दरअसल, आयुर्वेद की कुछ दवाइयों में सोना, चांदी और मोती की भस्म मिलाई जाती है. जिनसे कई प्रकार के रोग ठीक होते है. इसी कारण इन दवाओं की बिक्री सर्वाधिक हुआ करती थी, लेकिन अब इसकी बिक्री घट गई है. गरीब और मध्यम वर्ग के लिए ये दवा खरीद पाना नामुमकिन सा हो गाया है. ऐसे में बिना धातु और रत्न की भस्म के मिलने वाली दवाओं का विकल्प ही आयुर्वेद का इलाज पा रहे मरीजों के लिए शेष रह गया है.

सोने- चांदी भस्म युक्त आयुर्वेदिक दवाएं

इसे लेकर राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय भरतपुर के उपाधीक्षक डॉक्टर चंद्र प्रकाश दीक्षित ने बताया कि सोने चांदी के भाव बढ़ रहे हैं. ऐसे में आयुर्वेद में कई ऐसी दवाइयां हैं जिसमें सोने- चांदी भस्म युक्त दवाओं की कीमतों में वृद्धि हुई है. मरीज आयुर्वेदिक अस्पताल में दिखाने आते हैं तो इस प्रकार की भस्म से युक्त दवाइयां लिखने को मना कर देते है क्योंकि इन दवाइयों को खरीदना उनके बस की बात नहीं हो पा रही है.

मरीजों की पहुंच से दूर हुई स्वर्ण भस्म वाली दवाएं

वहीं अस्पताल में इलाज कराने आए मरीज अवधेश कुमार ने बताया कि सोने- चांदी  की बढ़ती कीमतों की वजह है कई आयुर्वेद की दवाएं जो इनकी भस्मों से बनती हैं वह महंगी है और हम लोग नहीं खरीद रहे हैं.  सरकार से यही मांग है कि सोने चांदी की भस्म में युक्त आयुर्वेद की दवाओं की कीमतों में कमी लाई जाए.

 3 हजार की दवा अब 10 हजार के पार

आयुर्वेदिक दवा विक्रेता हरेंद्र लवानिया के अनुसार, सोने-चांदी की कीमतों में आई बेतहाशा तेजी ने जीवन रक्षक दवाओं के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है. दवाओं की कीमतों में यह उछाल चौंकाने वाला है. वसंत कुसुमाकर रस  जो दवा पहले 3,700 रुपये की आती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 10,755 रुपये हो गई है. वहीं योगेंद्र रस 1,400 रुपये में मिलने वाली यह दवा अब 3,000 रुपये तक पहुंच गई है. आधा किलो च्यवनप्राश, जो पहले 1,470 रुपये का था, अब 2,000 रुपये के पार है. कुछ प्रीमियम कंपनियों के स्वर्ण-युक्त च्यवनप्राश की कीमत तो 10,000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.

दवा विक्रेताओं का कहना है कि ऐसी 50 से अधिक औषधियां हैं जिनमें सोने-चांदी की भस्म का उपयोग होता है और इन सभी के दाम आसमान छू रहे हैं. पहले से ही महंगी मानी जाने वाली ये दवाएं अब आम आदमी की पहुंच से पूरी तरह बाहर हो चुकी हैं, जिससे इनकी खरीद और बिक्री दोनों पर बुरा असर पड़ा है.

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