
Bharatpur News: आंध्र प्रदेश में तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलने का मुद्दा गरमाने के बाद इसका असर राजस्थान में दिख रहा है. प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में अब इसे लेकर अभियान भी शुरू कर दिया गया है. प्रदेश के 14 मंदिरों में प्रसाद की गुणवत्ता की जांच शुरू हो गई है. इसके लिए बाकायदा फूड विभाग की ओर से भोग सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया है. भरतपुर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर को भी यह सर्टिफिकेट जारी किया गया है. यहां दर्शन करने के लिए रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
बांके बिहारी को चढ़ता है खीर-पूड़ी, सब्जी-रोटी और पराठे का भोग
महंत मनोज शर्मा ने बताया कि बांके बिहारी मंदिर की गिनती राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में की जाती है. यहां सुबह शाम 10 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है. यहा बिहारी जी को अलग अलग प्रकार का प्रतिदिन राजभोग लगाया जाता है. जिसमे खीर-पूड़ी, सब्जी-रोटी, खिचड़ी, पराठा, माखन मिश्री, हलवा-चना और पोहे आदि हैं.
इस भोग को तैयार करने के लिए विशेष ध्यान रखा रखा जाता है. यह प्रसाद जिस रसोई में तैयार किया जाता है, उसकी प्रतिदिन ढंग से साफ-सफाई की साथ जाती है. साथ ही भोग तैयार के दौरान भी शुद्धता का ख्याल रखा जाता है.
अब मंदिर की रसोई की बजाय भक्त के घर में तैयार होता है प्रसाद
बांके बिहारी को लगने वाला राजभोग पहले मंदिर की रसोई में ही तैयार किया जाता था, लेकिन मंदिर निर्माण के बाद यह परंपरा बदल गई. अब यह भोग एक भक्त के घर तैयार होता है. मंहत का कहना है कि लाखों भक्तों की आस्था के इस केंद्र में भोग तैयार करते वक्त काफी सावधानी रखी जाती है. यही वजह है कि फूड विभाग ने श्री बांके बिहारी मंदिर को भोग प्रमाण-पत्र जारी किया गया है. यहां भक्तो को वितरण किए जाने वाला प्रसाद शुद्ध है और भक्त बिना किसी झिझक इस प्रसाद को ग्रहण कर सकते हैं.
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