Rajasthan Politics: बीजेपी के सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट के जरिए कांग्रेस सांसदों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि राजस्थान के सांसदों का पैसा हरियाणा क्षेत्र को दिया जा रहा है. जिसमें संजना जाटव, राहुल कसवां और बृजेंद्र ओला शामिल है. उनका एमपी फंड का पैसा कैथल विधानसभा में खर्च किया जा रहा है. जहां रणदीप सुरेजवाला के बेटे विधायक है. अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि यह जनता के पैसे की लूट है. वहीं इस मामले में राजस्थान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसके जवाब में कहा है कि सरकार आपकी है आप जांच कराएं.
अमित मालवीय ने क्या किया पोस्ट
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस से बड़ी कोई धोखेबाज़ पार्टी नहीं हो सकती. राजस्थान के करदाताओं के पैसे का खुला दुरुपयोग करते हुए कांग्रेस के तीन सांसद भरतपुर की संजना जाटव, चूरू के राहुल कसवां और झुंझुनूं के संसद बृजेंद्र ओला ने अपने एमपी–लेड फंड को हरियाणा के कैथल विधानसभा क्षेत्र में खर्च करने की सिफारिश की है, जो कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला के बेटे का निर्वाचन क्षेत्र है. मालवीय ने कहा कि यह सब पिछले 3–4 महीनों में हुआ है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह विकास नहीं, यह वंशवाद और जनता के पैसे की खुली लूट है. राजस्थान के लोगों का पैसा सुरजेवाला जूनियर को हरियाणा में क्यों दिया जा रहा है?
There is no bigger fraud party than the Congress.
— Amit Malviya (@amitmalviya) January 5, 2026
This time, it is looting the people of Rajasthan.
In a shocking misuse of taxpayers' money meant for the people of Rajasthan, three Congress MPs — Sanjana Jatav (Bharatpur), Rahul Kaswan (Churu) and Brijendra Singh Ola… pic.twitter.com/XsQCZGwP59
अमित मालवीय के ट्वीट पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि सांसदों ने नियमों के अनुसार ही किया होगा. जूली ने कहा कि राज्यसभा सदस्यों के लिए कुछ पैसा अलग जगह पर खर्च करने का प्रावधान होता है.
अधिकारियों ने चेक नहीं किया कि कौन सा लेटर कहा जा रहा
लेकिन जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को इस बात का ध्यान दिलाया गया कि यह सिफारिश राज्यसभा सदस्यों ने नहीं, बल्कि लोकसभा सांसदों ने की है. तीनों सांसदों के नाम बताकर जूली से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि, सरकार बीजेपी की है, अधिकारी भी उनके हैं. क्या ये चेक नहीं करते कि कौन-सा लेटर कहां जा रहा है? इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर नियमों के बाहर सिफारिश की गई है तो तो सरकार जांच कराए.
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