
अरुणाचल प्रदेश में सेना की गश्त के दौरान हुए हादसे में शहीद हुए डीडवाना जिले के फरमान खान को 6 सितंबर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. शहीद की पार्थिव देह को सुबह सेना के विशेष वाहन से उनके पैतृक गांव लाया गया. गांव में शहीद के पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई. गांव में शहीद के पार्थिव शरीर को कंधे पर उठाकर अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए.
बाप- बेटे को मिलाना कुदरत को नही था मंजूर
हर मां-बाप की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा जब दुनिया में आए तो सबसे पहले उसका चेहरा पिता देखे, लेकिन शहीद हुए फरमान खान के एक बच्चे ने जब दुनिया में आने के बाद आंखें खोली, उससे पहले उसका पिता शहीद हो चुका था. इसे दुः संयोग ही कहेंगे कि 3 सितंबर को फरमान खान शहीद हो गए और 4 सितंबर को उसका मासूम पैदा हुआ और दोनों एकदूसरे को देख तक नहीं सके.
लेखापानी में गश्त करने के दौरान हुए शहीद
शहीद हुए फरमान खान भारतीय सेना की 16 ग्रेनेडियस के जवान थे. वे अरुणाचल प्रदेश के लेखापानी में गश्त कर रहे थे, तभी एक हादसे में फरमान की शहादत हो गई. फरमान खान के शहीद होने से उनके परिवार और गांव में शोक की लहर है.

सेना से जुड़ा रहा है शहीद फरमान खान का परिवार
फरमान खान का जन्म 1995 में डीडवाना जिले के सरदारपुरा कलां गांव में हुआ था. उन्होंने 2017 में भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद 13 ग्रेनेडियस में शामिल हुए थे. शहीद फरमान खान का परिवार का सेना से जुड़ा रहा है. शहीद के पिता यासीन खान भी CRPF के जवान थे. उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी देश की सुरक्षा में गुजारी. 2018 में उनका निधन हो गया. फरमान खान की शादी 2020 में हुई थी और उनके दो बच्चे हैं. दो दिन पहले ही फरमान खान के घर बेटे का जन्म हुआ है.

शहीद फरमान खान को लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
शहीद को राजकीय तरीके से दफनाने के समय डीडवाना विधायक चेतन डूडी, भाजपा नेता जितेंद्र सिंह जोधा, सेना के अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे. उन्होंने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की. सेना के जवानों ने शहीद को सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर दिया. इसके बाद नमाज-ए-जनाजा अदा की गई और शहीद को सुपुर्द-ए-खाक किया गया.