राजस्थान के डूंगरपुर में आज सत्ता के संघर्ष की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने प्रशासन को भी हैरान कर दिया. सागवाड़ा नगरपालिका में 'एक म्यान में दो तलवारें' वाली कहावत सच साबित हुई. यहां एक अध्यक्ष की टेबल पर दो कुर्सियां लगीं और उन पर कांग्रेस और बीजेपी के दो अलग-अलग 'अध्यक्ष' भी बैठे. इस दौरान एक तरफ कांग्रेस के नरेंद्र खोड़निया बैठे तो दूसरी तरफ बीजेपी के आशीष गांधी. दोनों के चेहरे पर मुस्कान है, लेकिन माहौल में गजब की तल्खी. दोनों ही दावा कर रहे हैं कि सागवाड़ा नगरपालिका के 'असली चेयरमैन' वही हैं.
स्टे मिलने के बाद खोड़निया एक्शन में
बुधवार (14 जनवरी) को हाईकोर्ट से निलंबन पर स्टे मिलने के बाद नरेंद्र खोड़निया एक्शन मोड में हैं. सुबह ऑफिस खुलते ही कमरे के बाहर उनकी नेमप्लेट भी लगा दी गई. उनका कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद वे बहाल हो गए हैं, इसलिए किसी के आदेश का इंतजार क्यों करें? नरेंद्र खोड़निया का कहना है कि, "माननीय हाईकोर्ट ने मेरे निलंबन पर रोक लगा दी है. स्टे का मतलब ही यही है कि मैं वापस अपने पद पर हूं. कानूनन मैं ही अध्यक्ष हूं और इसीलिए मैंने कार्यभार संभाल लिया है."
बीजेपी नेता ने दिया ये तर्क
बीजेपी के आशीष गांधी प्रशासन और सरकार के आदेश का हवाला दे रहे हैं. उनका कहना है कि वे कुर्सी छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन सिस्टम के हिसाब से. आशीष गांधी का तर्क है, "अभी सरकार की तरफ से कोई लिखित आदेश नहीं आया है. आयुक्त ने मार्गदर्शन मांगा है. जैसे ही सरकार कहेगी, मैं इस्तीफा दे दूंगा. लेकिन तब तक मैं ही अध्यक्ष हूं."
इस 'म्यूजिकल चेयर' के खेल में अधिकारी परेशान
अब अधिकारी असमंजस में हैं कि फाइल पर साइन किसके मान्य होंगे? फिलहाल, सागवाड़ा में सियासत गर्म है और प्रशासन सरकार के अगले आदेश के इंतजार में ठंडा पड़ा है. इस पूरे मामले में नगरपालिका आयुक्त ने गेंद सरकार के पाले में डाल दी है. उन्होंने सरकार से मार्गदर्शन मांगा है. लेकिन जब तक जवाब नहीं आता, सागवाड़ा नगरपालिका में यह 'म्यूजिकल चेयर' का खेल चलता रहेगा.
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