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This Article is From Jan 13, 2026

राजस्थान में किसान मचाने वाले हैं बवाल! जयपुर जाने वाला रास्ते... अजमेर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

नागौर के रियांबड़ी से किसानों और सांसद हनुमान बेनीवाल के जयपुर की ओर कूच के ऐलान के बीच अजमेर में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है.

राजस्थान में किसान मचाने वाले हैं बवाल! जयपुर जाने वाला रास्ते... अजमेर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
किसानों के लिए अजमेर में पुलिस की तैनाती

Rajasthan Farmer Protest: राजस्थान में एक बार फिर किसानों का बवाल मचाने वाले हैं, क्योंकि किसानों का प्रोटेस्ट शुरू हो गया है. किसान राजधानी जयपुर कूच करने वाले हैं. नागौर के रियांबड़ी से किसानों और सांसद हनुमान बेनीवाल के जयपुर की ओर कूच के ऐलान के बीच अजमेर में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. हनुमान बेनीवाल और किसानों के अजमेर संभागीय आयुक्त कार्यालय पहुंचने की संभावित सूचना मिलते ही पुलिस महकमा अलर्ट मोड पर आ गया है. 

अजमेर शहर और खासकर संभागीय आयुक्त कार्यालय के आसपास सुरक्षा इंतजाम कड़े कर दिए गए हैं. प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पहले से ही सतर्क नजर आ रहा है.

अजमेर नॉर्थ से सिविल लाइन तक भारी पुलिस तैनाती

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अजमेर नॉर्थ पुलिस उप अधीक्षक शिवम जोशी, सदर कोतवाली थाना प्रभारी अनिल दवे, सिविल लाइन थाना पुलिस सहित अतिरिक्त पुलिस बल को संभागीय आयुक्त कार्यालय के बाहर तैनात किया गया है. पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और जवानों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था भंग न हो. शहर में आने-जाने वाले प्रमुख मार्गों पर भी नजर रखी जा रही है ताकि आंदोलन की आंच शहर के अंदर न फैले.

मुख्य द्वार पर सख्त घेराबंदी

सबसे अहम बात यह रही कि संभागीय आयुक्त कार्यालय के मुख्य द्वार पर एक दर्जन से ज्यादा बैरिकेडिंग लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पुख्ता कर दिया गया है. कार्यालय परिसर को लगभग किले में तब्दील कर दिया गया है. जहां बिना अनुमति किसी को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है. पुलिस बल लगातार चौकसी बरत रहा है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है. आंदोलनकारियों के संभावित आगमन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. फिलहाल हालात नियंत्रण में बताए जा रहे हैं, लेकिन किसानों के रुख और बेनीवाल के अगले कदम पर पूरे अजमेर संभाग की नजर टिकी हुई है.

बता दें, किसान अवैध बजरी खनन पर रोक, फसल बीमा बकाया भुगतान, पुष्कर-मेड़ता-रास रेलवे लाइन निर्माण, बढ़ी बिजली दर से किसानों को राहत और किसानों पर दर्ज राजनीतिक मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर अल्टीमेटम दिया था. जिसके बाद किसान अब आंदोलन तेज कर रहे हैं.

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