Rajasthan News: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डिस्टर्ब एरिया एक्ट को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जिस राजस्थान की पहचान भाईचारे अपनायत और पधारो म्हारे देस की संस्कृति से रही है उसी प्रदेश को अब अशांत घोषित करने की कोशिश की जा रही है. गहलोत ने इसे राजस्थान के इतिहास का बेहद शर्मनाक कदम बताया.
कांग्रेस सरकार का शांति का मॉडल
अशोक गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर देश का पहला शांति और अहिंसा विभाग बनाया था. इस विभाग का मकसद संवाद सद्भाव और प्रेम के जरिए समाज को मजबूत करना था ताकि किसी भी तरह की नफरत को पनपने का मौका न मिले.
भाजपा पर विभाग ठप करने का आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार सत्ता में आते ही सबसे पहले शांति और अहिंसा विभाग को निष्क्रिय कर दिया. अब डिस्टर्ब एरिया एक्ट लागू कर राजस्थान को सांप्रदायिक प्रयोगशाला बनाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह सोच प्रदेश की मूल संस्कृति के खिलाफ है.
जिस राजस्थान की पहचान भाईचारे, अपनायत और ‘पधारो म्हारे देस' की संस्कृति से रही है, उसी प्रदेश को भाजपा सरकार अब ‘डिस्टर्ब एरिया एक्ट' के ज़रिये ‘अशांत' घोषित करने पर तुली है। यह राजस्थान के इतिहास का अत्यंत शर्मनाक कदम है।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) January 23, 2026
फर्क साफ है- हमारी कांग्रेस सरकार ने महात्मा गांधी के…
हालात सामान्य फिर कानून क्यों
पूर्व सीएम ने साफ कहा कि राजस्थान में न तो ऐसे हालात हैं और न ही यहां नफरत की कोई जमीन है. उन्होंने चेताया कि यह कानून आम लोगों की संपत्ति के मूल्य को गिराएगा और वर्षों से साथ रह रहे समाज को बांटने का काम करेगा.
विफलताओं से ध्यान हटाने का आरोप
गहलोत ने भाजपा सरकार पर प्रशासनिक विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए पोलराइजेशन का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राजस्थान की जनता शांति और सौहार्द चाहती है किसी भी तरह का डिस्टर्ब टैग नहीं. अशोक गहलोत ने दो टूक कहा कि कांग्रेस इस विभाजनकारी सोच का हर स्तर पर विरोध करेगी और प्रदेश की सामाजिक एकता को कमजोर नहीं होने देगी.