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This Article is From Apr 04, 2025

Asaram Message: 'मूर्खता का त्याग कीजिए...', आसाराम की भक्तों से अपील, वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर किया खास मैसेज

Asaram Appeals to His Devotees: आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर 7 अप्रैल को जोधपुर हाई कोर्ट में सुनवाई होनी है. इससे पहले यह मैसेज वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर किया गया है.

Asaram Message: 'मूर्खता का त्याग कीजिए...', आसाराम की भक्तों से अपील, वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर किया खास मैसेज
आसाराम ने अपने भक्तों से प्रवचन के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने का अनुरोध किया है.
IANS

Rajasthan News: जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम (Asaram) ने अपने भक्तों के लिए एक खास मैसेज वॉट्सऐप ग्रुप में शेयर करवाया है, जिसका स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है. इस वॉट्सऐप मैसेज के जरिए आसाराम ने अपने भक्तों से मुर्खता का त्याग करने की अपील की है. आसाराम ने साफ शब्दों में कहा है कि सत्संग के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट न करें, न ही इधर-उधर किसी को भेजें, क्योंकि इसका फायदा विरोधी उठा रहे हैं.

आसाराम के मैसेज में क्या लिखा है?

इस मैसेज में लिखा है- 'अदालत में लड़की के वकील ने बोला है कि फेसबुक पर बहुत सारे सत्संग पड़े हुए हैं. तारीख के साथ. कोर्ट चाहे तो चेक कर सकती है. आप लोग जो हर चीज सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं, ये उसी का नेगेटिव असर है. अब ये वीडियो अदालत में हमारे खिलाफ ही इस्तेमाल हो रहे हैं. भाव में आकर या मूर्खता में हम सब कुछ सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं. लेकिन नतीजा ये होता कि विरोधी उसका फायदा उठाते हैं. इसीलिए, सभी से अनुरोध है कि मूर्खता का त्याग करें और सत्संग इधर-उधर भेजना बंद करें. सोशल मीडिया पर कोई वीडियो पोस्ट न करें.'

7 अप्रैल को HC में जमानत पर सुनवाई

बताते चलें कि आसाराम ने अंतरिम जमानत के लिए राजस्थान हाई कोर्ट में याचिका लगाई हुई है. 2 अप्रैल को उस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है. हालांकि, जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की बेंच ने आसाराम को कोई राहत नहीं दी है. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आसाराम ने प्रवचन दिए हैं, जो निश्चित रूप से सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन है. इस पर कोर्ट ने आसाराम के वकील से शपथ पत्र मांगा, ताकि यह प्रमाणित किया जा सके कि सुप्रीम कोर्ट की शर्तों का उल्लंघन नहीं हुआ है. इस मामले में अब 7 अप्रैल को अगली सुनवाई होनी है. 

जमानत की शर्तें क्या थीं?

आसाराम को पिछली बारी अंतरिम जमानत देते वक्त कोर्ट ने अनुयायियों से समूह में नहीं मिलना, सभाओं को संबोधित नहीं करना, मीडिया से बात नहीं करना, सुरक्षा में तैनात 3 पुलिसकर्मियों का खर्च उठाना जैसी शर्तें रखी थीं. हालांकि प्रवचन के वीडियो सोशल मीडिया के जरिए सामने आ गए. इस वजह से अब आसाराम को अंतरिम जमानत अवधि आगे बढ़ाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

2013 का केस, 2018 में मिली सजा

अगस्त 2013 में एक 16 वर्षीय लड़की ने आसाराम पर राजस्थान के जोधपुर के पास अपने आश्रम में उसका यौन उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था. पीड़िता के माता-पिता ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके कारण 31 अगस्त 2013 को आसाराम को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद अप्रैल 2018 में, जोधपुर की एक अदालत ने आसाराम को नाबालिग के बलात्कार के लिए दोषी ठहराया, और उसे भारतीय दंड संहिता, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई.

आसाराम पर चल रहे ये सभी केस

अक्टूबर 2013 में और आरोप सामने आए जब सूरत की एक महिला (जो कि एक पूर्व शिष्या हैं) ने आसाराम पर अहमदाबाद के मोटेरा में अपने आश्रम में 2001 से 2006 के बीच बार-बार यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया. इसके बाद एक और कानूनी मामला सामने आया, जिसका समापन जनवरी 2023 में हुआ जब गांधीनगर की एक अदालत ने आसाराम को बलात्कार के लिए दोषी ठहराया, जो इस तरह के आरोपों पर उनकी दूसरी सजा थी. इन सजाओं के अलावा, आसाराम के बेटे नारायण साईं पर भी इसी तरह के आरोप लगे. 2013 में सूरत की दो बहनों ने आरोप लगाया कि आसाराम और नारायण ने 2000 के दशक के मध्य में उनका यौन उत्पीड़न किया था. बड़ी बहन ने आसाराम पर आरोप लगाया, जबकि छोटी बहन ने नारायण पर 2002 से 2005 के बीच सूरत आश्रम में हमले का आरोप लगाया.

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