
Rajasthan News: अशोक गहलोत के आरोपों के बाद राजस्थान में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. पूर्व सीएम गहलोत के आरोप पर पहले किरोड़ी लाल मीणा ने प्रतिक्रिया दी. अब नागौर सांसद और आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने अशोक गहलोत के बयान पर पलटवार किया है. बेनीवाल ने कहा कि मेरा स्टैंड हमेशा जन भावना को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट था और सार्वजनिक था. इसलिए मुझे आपके किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है कि आपकी सरकार गिराने से जुड़े मामले में मेरी क्या भूमिका थी.
'बिना शर्त सचिन पायलट को समर्थन'
हनुमान बेनीवाल ने पूर्व सीएम गहलोत के आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए मीडिया से कहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद जब सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री बनने के लिए मुझसे समर्थन मांगा था. तब बिना किसी शर्त के मैंने सचिन पायलट को सीएम बनाने के लिए RLP के तीन विधायकों का समर्थन कांग्रेस पार्टी को देने की बात कही.
चूंकि मानेसर प्रकरण कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी कलह का नतीजा था, क्योंकि जनता के हितों को भुलाकर आप सीएम बने रहने और आपकी पार्टी के नेता सीएम बनने की दौड़ में लग गए. चूंकि आप वयोवृद्ध नेता हैं. इसलिए आपको स्मरण दिलाना चाहता हूं कि राजस्थान के इतिहास में यह बात हमेशा याद रखी जाएगी कि जिनके शासन काल में लाखों मेहनतकश युवाओं के सपनों के साथ सबसे ज्यादा कुठाराघात हुआ,वो शासन काल आपका था.
मंत्रिमंडल के सदस्यों नहीं बैठा सके तालमेल
बेनीवाल ने आगे कहा कि गहलोत जी यह क्यों भूल गए है कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए सीएमओ में बैठे अधिकारी, उनके नजदीकी नेता और वो लोग जिन्हें जनता आपका दलाल कहती थी. सभी की भूमिका पेपर लीक जैसे मामलों में थी. आपकी सरपरस्ती में ही जिन लोगों ने राजस्थान के बेरोजगार युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ किया. उनके खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर आपने एक शब्द तक नहीं बोला. आप तो अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों के साथ ही तालमेल नहीं बैठा सके.
इसलिए आपने विधायकों और मंत्रियों को होटल में नजरबंद रखा और होटलों से सरकार चलाई. आपके शासन में राजस्थान देश भर में अपराध में एक नंबर पर आ गया. पेपर लीक में एक नंबर पर आ गया. इसलिए नैतिक रूप से तो आपको किसी पर आरोप लगाने का कोई अधिकार ही नहीं है, क्योंकि आपने अपने आलाकमान की परिक्रमा करके 15 वर्षों तक राजस्थान की जनता को ठगा.
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