विज्ञापन
This Article is From Dec 24, 2025

भारत-पाक सीमा पर बनेगा 'ऑपरेशन सिंदूर' एयरबेस, राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट ने श्रीगंगानगर में भारत-पाक सीमा के पास बनने वाले अत्याधुनिक एयरबेस प्रोजेक्ट ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को हरी झंडी दी. जिसमें 58 किसानों की याचिका खारिज कर कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि माना है. 

भारत-पाक सीमा पर बनेगा 'ऑपरेशन सिंदूर' एयरबेस, राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
श्रीगंगानगर में भारत-पाक सीमा के पास बनेगा एयरबेस.

Rajasthan News: राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास एक अत्याधुनिक फॉरवर्ड कंपोजिट एविएशन बेस बनाने का रास्ता साफ हो गया है. राजस्थान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सबसे ऊपर रखते हुए 58 किसानों की याचिका को खारिज कर दिया. अब 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम का यह महत्वपूर्ण रक्षा प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ सकेगा. कोर्ट ने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े कामों में व्यक्तिगत हितों से ज्यादा जनहित को महत्व दिया जाता है.'

ऑपरेशन सिंदूर' क्या है और क्यों जरूरी

यह रक्षा मंत्रालय की बड़ी योजना है जिसमें श्रीगंगानगर के लालगढ़ जाटान गांव और आसपास के इलाकों में पाकिस्तान सीमा के नजदीक एक आधुनिक एयरबेस तैयार किया जाएगा. रणनीतिक दृष्टि से यह बहुत अहम है क्योंकि इससे वायुसेना की सीमा पर तेज कार्रवाई की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी. प्रोजेक्ट के लिए चक 21 SDS की 130.349 हेक्टेयर निजी जमीन और 2.476 हेक्टेयर सरकारी जमीन कुल 132.825 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है.

किसानों की याचिका में दावे 

58 किसानों ने कोर्ट में कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का उल्लंघन हुआ है. सामाजिक प्रभाव आकलन निष्पक्ष नहीं था. प्रभावित लोगों की जनसुनवाई सही तरीके से नहीं हुई. पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन की कोई योजना नहीं बनी जबकि कई किसानों की आजीविका प्रभावित हो रही है.

मुआवजा बाजार दर और सेल डीड के आधार पर तय नहीं किया गया. वे 14 नवंबर 2023 की शुरुआती अधिसूचना से लेकर 25 जुलाई 2025 के अवॉर्ड तक पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग कर रहे थे.

सरकार का मजबूत पक्ष

केंद्र और राज्य सरकार के वकीलों ने बताया कि यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और 'ऑपरेशन सिंदूर' से जुड़ा हुआ है. सामाजिक प्रभाव आकलन प्राभु फाउंडेशन ने किया था. 27 सितंबर 2022 को जनसुनवाई हुई जिसकी वीडियो और फोटो रिकॉर्ड मौजूद हैं.

16 अक्टूबर 2024 की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट से साफ है कि किसी का घर या मकान नहीं टूट रहा. कोई विस्थापन नहीं हो रहा इसलिए पुनर्वास योजना की जरूरत नहीं पड़ी. कुल 162 किसान प्रभावित हैं लेकिन किसी की मुख्य आजीविका नहीं छीनी जा रही. पुनर्वास के लिए पात्र परिवारों की संख्या शून्य है.

कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की एकल पीठ ने सभी रिकॉर्ड जांचे. जनसुनवाई की तारीख अखबार में छपी थी. मिनट्स फोटो सब ठीक हैं. संयुक्त सर्वे आपत्तियों का निपटारा स्पीकिंग ऑर्डर सब कानून के अनुसार हैं. डिविजनल कमिश्नर को पुनर्वास प्रशासक बनाया गया उनकी रिपोर्ट भी सही है. कोर्ट ने याचिका को तकनीकी आपत्तियों पर आधारित बताते हुए इसे प्रोजेक्ट रोकने की साजिश करार दिया. सभी अंतरिम आवेदनों को भी खारिज कर दिया.

यह भी पढ़ें- DSP एपीओ और थाना अधिकारी लाइन हाजिर, अवैध खनन को लेकर डीजीपी राजीव शर्मा बड़ी की कार्रवाई

पूरी स्टोरी पढ़ें

Rajasthan.NDTV.in पर राजस्थान की ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें. देश और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं. इसके अलावा, मनोरंजन की दुनिया हो, या क्रिकेट का खुमार, लाइफ़स्टाइल टिप्स हों, या अनोखी-अनूठी ऑफ़बीट ख़बरें, सब मिलेगा यहां-ढेरों फोटो स्टोरी और वीडियो के साथ.

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com