देश में कहीं भी होने वाली आतंकी मुठभेड़ों में रोबोट का इस्तेमाल करके आतंकियों की पहचान और निष्क्रिय करने से हमारे जवानों को हमलों के जोखिम से बचाया जा सकता है. हाल ही में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में भारतीय सेना ने मानव रहित रोबोट 'जीना' का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. भारतीय सेना ने इस ऑपरेशन में हथियारों से लैस तीन आतंकवादी मार गिराया था. इस ऑपरेशन के दौरान रोबोट की मदद से जोखिम वाले इलाकों में निगरानी और कार्रवाई को अंजाम दिया गया.
फंसे सैनिकों को निकालने में सक्षम
भारतीय सेना की 50 पैरा स्पेशल फोर्सेज में ऑटोनॉमस अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल (UGV) ‘डैगर' यानी मानव रहित रोबोट को शामिल किया गया है. डैगर भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी और नेक्स्ट-जनरेशन ऑटोनॉमस रोबोट है. इसकी खासियत यह है कि यह युद्ध क्षेत्र में फंसे घायल सैनिकों को निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सक्षम है. यह लगभग 450 किलोग्राम वजन को उठाने में सक्षम है.

गणतंत्र दिवस की परेड में होगा प्रदर्शन
खास बात यह है कि ‘डैगर' और ‘जीना' दोनों रोबोट जयपुर में तैयार किए गए हैं. इन्हें जयपुर के सीतापुरा क्षेत्र में स्थित क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स ने ‘मेक इन इंडिया' पहल के तहत डिजाइन और विकसित किया है. अब देश की राजधानी दिल्ली में इन अत्याधुनिक रोबोट्स की ताकत देखने को मिलेगी. आर्मी ग्राउंड व्हीकल ‘डैगर' और हथियारबंद ऑटोनॉमस रोबोट ‘जीना' को 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में प्रदर्शित किया जाएगा.
इन रोबोट्स को भारतीय सेना की जरूरतों और दुश्मन के खिलाफ ऑपरेशनल अनुभवों को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है. कृष्णा रोबोट को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है. यह रोबोट जयपुर में 26 जनवरी को फायर ब्रिगेड की झांकी में प्रदर्शित किया जाएगा. इसकी खासियत है कि यह खतरनाक परिस्थितियों में मानव जीवन को जोखिम में डाले बिना विकट परिस्थितियों से निपटने में सक्षम है. इस रोबोट की खासियत है कि यह अत्यधिक तापमान या धुएं का भी कोई असर नहीं पड़ता है.

स्वदेशी रक्षा रोबोट किए विकसित
यह अत्याधुनिक AI- द्वारा संचालित अग्निशमन यूजीवी है, जो औद्योगिक, तेल-गैस, रासायनिक संयंत्रों और विस्फोटक क्षेत्रों जैसे में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए बनया गया है. इसके ऑनबोर्ड कैमरों और सेंसरों द्वारा रीयल-टाइम निगरानी प्रदान करते हुए यह दूर से वास्तविक परिस्थितियों की सटीक जानकारी प्रदान करता है. इन रोबोट में बेहतर गतिशीलता, रिमोट ऑपरेशन, एआई आधारित निगरानी और जरूरत के अनुसार पेलोड बदलने की सुविधा दी गई है. ये रोबोट GPS सिग्नल न होने वाले इलाकों में भी काम करने में सक्षम हैं.
दरअसल जयपुर की रोबोटिक्स कंपनी क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स वर्ष 2009 से रोबोटिक्स के क्षेत्र में काम कर रही है. कंपनी ने अब भारतीय रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी रक्षा रोबोट और मानव रहित ग्राउंड वाहन (UGV) विकसित किए हैं. क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा का कहना है कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है.

कंपनी रक्षा के साथ-साथ औद्योगिक सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी रोबोटिक समाधान विकसित कर रही है. ये रोबोट आधुनिक युद्ध क्षेत्र और सुरक्षा अभियानों के लिए तैयार किए गए हैं. इन्हें ऊंचे पहाड़ी इलाकों, कठिन मौसम और खराब ऑफ-रोड परिस्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. ये रक्षा रोबोट टोही, निगरानी, गश्त, सामरिक सहायता और खतरे की पहचान जैसे अभियानों में सुरक्षा बलों की मदद कर सकते हैं. इसका उद्देश्य जोखिम भरे हालात में सैनिकों की जान को सुरक्षित रखना है.