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भीषण गर्मी से खादी की साड़ी महिलाओं को दिलाएगी राहत, जयपुर साड़ी स्टोरी के मंच पर एक्सपर्ट ने बताए फायदे

आयोजक साधना गर्ग ने बताया कि इस प्रोग्राम का मकसद महिलाओं को देश भर में बनने वाले बुने हुए कपड़े और लोकल कलाकारों के बारे में बात करना था ताकि लोकल आर्ट दुनिया में प्रमोट हो

भीषण गर्मी से खादी की साड़ी महिलाओं को दिलाएगी राहत,  जयपुर साड़ी स्टोरी के मंच पर एक्सपर्ट ने बताए फायदे
जयपुर साड़ी स्टोरी के मंच पर मौजूद अतिथि.

राजस्थान की राजधानी जयपुर में जयपुर साड़ी स्पीक के बैनर तले महिलाओं को समर्पित एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिसमें खादी की बनी साड़ियों के फायदे बताए गए. इस कार्यक्रम में मोंटेनेग्रो की मानद महावाणिज्यदूत डॉ. जेनिस दरबारी भी शामिल हुए. उन्होंने कहा कि राजस्थान की गर्मी में खादी की बनी साड़ियां अगर पहनी जाए तो महिलाओं को बहुत राहत मिलेगी. डॉ. दरबारी ने कहा कि खादी की बनी साड़ियों से महिलाओँ को गर्मी कम लगेगी. साथ ही पसीने से होने वाली बीमारियां भी नहीं होगी. 

खादी और लोकल आर्टिजंस की बुनी साड़ियों को प्रमोट करने आई जेनिस दरबारी ने अपने संबोधन के दौरान खादी की साड़ियों के प्रचार-प्रसार के प्रति अपने 40 साल के समर्पण पर प्रकाश डाला. उन्होंने ब्रिटेन से मैसेडोनिया और फिर मोंटेनेग्रो तक साड़ियाँ के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि 1978 में क्रोएशिया में हवार मोडफेस्ट में बिना सिलाई के साड़ी पहनने का प्रदर्शन किया गया. जिसने दुनिया भर के डिज़ाइनरों को प्रभावित किया.

मालूम हो कि मोंटेनेग्रो यूरोप का एक देश है, यहां पर यूनेस्को की सबसे अधिक हैरिटेज साइट्स मौजूद है. मोंटेनेग्रों की भारत में डिप्लोमैट डॉ. जेनिस दरबारी पूरी दुनिया में भारत के कल्चर और पहनावे को प्रमोट करने के लिए भी मशहूर हैं. 

इस प्रोग्राम में साधना गर्ग से बात करते हुए डॉ जेनिस ने कहा कि खादी ने तो देश की आजादी की लड़ाई में क्रांति ला दी थी. महिलाओं ने अंग्रेजी कपड़े का बहिष्कार करते हुए खादी की बुनी हुई साड़ियां और कपड़े पहनना शुरू कर दिया था. आज अंग्रेज तो नहीं हैं मगर आज हम खुद हाथ की बुनी साड़ियां नहीं पहनते. बुनकर और कारीगर इस लिए बुरे हाल में हैं, अगर एक महिला साल में मात्र दो हाथ से बनी साड़ियां पहन ले तो देश में कारीगरों के हालात बदल जाएंगे, साथ ही स्किन के रोग भी कम होंगे. 

आयोजक साधना गर्ग ने बताया कि इस प्रोग्राम का मकसद महिलाओं को देश भर में बनने वाले बुने हुए कपड़े और लोकल कलाकारों के बारे में बात करना था ताकि लोकल आर्ट दुनियां में प्रमोट हो. इस कार्यक्रम में जयपुर की जानी मानी 150 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया. जिसमें फ्री पिछवाई व फ्लावर पेटल पार्टी भी आयोजित की गई. इसमें महिलाओं को पिछवाई आर्ट बनाना सिखाया गया. 

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