Rajasthan News: राजस्थान का विश्व प्रसिद्ध डेजर्ट फेस्टिवल 2026 जैसलमेर में कला संस्कृति लोक संगीत और रोमांच की बहार लेकर आ रहा है. इस बार का 47वां आयोजन "बीट्स ऑफ द थार" थीम पर आधारित होगा जो थार रेगिस्तान की पारंपरिक धुनों लोक वाद्यों और सदियों पुरानी विरासत को दुनिया के सामने पेश करेगा.
फेस्टिवल की तारीखें घोषित हो चुकी हैं और पोस्टर भी जारी कर दिया गया है. यह 30 जनवरी से 1 फरवरी तक चलेगा जबकि एक दिन पहले 29 जनवरी को पोकरण में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे. देश विदेश के पर्यटक इसकी ओर खिंचे चले आएंगे.
थार की सांस्कृतिक धड़कन को वैश्विक मंच
पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक कमलेश्वर सिंह ने बताया कि इस साल की थीम पर्यटकों को अपने आप आकर्षित करेगी क्योंकि यह थार की सच्ची आत्मा को दर्शाती है.
फेस्टिवल में बीएसएफ का रोमांचक कैमल टेटू शो भारतीय वायुसेना की एयर वॉरियर ड्रिल और ध्रुव हेलीकॉप्टर्स से सारंग डिस्प्ले जैसे शो जोश भर देंगे. ये प्रस्तुतियां दर्शकों को देशभक्ति से सराबोर कर देंगी और युवाओं में नया उत्साह जगाएंगी.
पारंपरिक प्रतियोगिताएं और नवाचार
फेस्टिवल की पारंपरिक प्रतियोगिताएं जैसे मिस्टर डेजर्ट और मिस मूमल हमेशा की तरह सबका ध्यान खींचेंगी. पूर्व विजेता विजय बल्लाणी ने कहा कि यह आयोजन हिंदू कैलेंडर के माघ मास शुक्ल पक्ष त्रयोदशी से शुरू होता है. इस बार कई नए प्रयोग जोड़े गए हैं जैसे खाभा डायरी इवेंट आधुनिक हथियारों की प्रदर्शनी और बीएसएफ व वायुसेना की ड्रिल. खाभा फोर्ट को नया पर्यटन स्थल बनाने की कोशिश में यह इवेंट जुड़ा है.
पर्यटन विशेषज्ञ जितेंद्र सिंह ने बताया कि खाभा डायरी में पारंपरिक वेशभूषा ऊंटों का श्रृंगार करने वाले कारीगरों को बुलाया जा रहा है. साथ ही विलुप्त हो रहे सिंधी सारंगी और कमायचा जैसे वाद्यों को फिर से जीवंत करने का प्रयास होगा.
पर्यटन व्यवसाय में उत्साह, इंक्वायरी का सिलसिला शुरू
पर्यटन से जुड़े लोग इस फेस्टिवल को लेकर बेहद उत्साहित हैं. सम वेल्फेयर सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष कैलाश व्यास ने कहा कि दिसंबर का सीजन शानदार रहा और अब जनवरी अंत में फेस्टिवल होने से 24 घंटों में ही ढेर सारी पूछताछ आ रही हैं. आयोजन सोनार दुर्ग से शुरू होकर रेगिस्तानी ड्यूंस पर खत्म होगा जो पर्यटकों को यादगार अनुभव देगा.
47 सालों का सफर, पर्यटन का माइलस्टोन
47 साल पहले शुरू हुआ यह फेस्टिवल जैसलमेर की पर्यटन इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए था और आज यह माइलस्टोन बन चुका है. जैसलमेर विकास समिति के सचिव चंद्रप्रकाश व्यास ने कहा कि मरू महोत्सव ने जैसलमेर को अनोखी पहचान दी है.
इसका प्रमाण कुलधारा में जनवरी के पहले हफ्ते तक 2 लाख पर्यटकों का पहुंचना है जो खाभा डायरी की सफलता दिखाता है. राजस्थानी भाषा सिर्फ बोलचाल नहीं बल्कि पूरी परंपरा और संस्कृति है. दुनिया भर के लोग इसी से रूबरू होने जैसलमेर आते हैं और मरू महोत्सव उन्हें यह मौका देता है. यह फेस्टिवल न सिर्फ मनोरंजन बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम भी है.
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