Rajasthan News: पश्चिमी राजस्थान से लेकर दक्षिण भारत तक फैले साइबर अपराध के एक बड़े नेटवर्क का जोधपुर की चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए करोड़ों रुपयों की ठगी करने वाली गैंग के मुख्य गुर्गे श्रवण विश्नोई और उसके साथी धीरसिंह को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. यह शातिर अपराधी फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) के जरिए दक्षिण भारत की गैंग को ठगी की रकम ठिकाने लगाने में मदद करता था.
एक छोटी सी खरीदारी और खुल गया राज
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित एक किराना स्टोर पर दो युवकों ने करीब 36 हजार रुपये का सामान खरीदा और उसका भुगतान ऑनलाइन किया. इस भुगतान के तुरंत बाद व्यापारी का बैंक खाता सीज हो गया. व्यापारी की शिकायत पर थानाधिकारी ईश्वरचन्द्र पारीक के नेतृत्व में टीम गठित की गई. सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस ने आरोपी श्रवण विश्नोई और धीरसिंह को धर दबोचा.
'डिजिटल अरेस्ट' का खतरनाक खेल
पूछताछ में श्रवण विश्नोई ने चौंकाने वाले खुलासे किए. उसने बताया कि वह टेलीग्राम के माध्यम से दक्षिण भारत की एक बड़ी साइबर ठग गैंग के संपर्क में था. यह गैंग लोगों को 'एंटी टेररिज्म ऑफिसर' बनकर कॉल करती थी. वे पीड़ितों को डराते थे कि उनके बैंक खाते और [Aadhaar Redacted] का लिंक आतंकवादियों से जुड़ा है और पाकिस्तान को पैसा भेजा जा रहा है. जांच के नाम पर वे लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' कर उनसे सारी जमा पूंजी श्रवण द्वारा उपलब्ध कराए गए फर्जी खातों में ट्रांसफर करवा लेते थे.
करोड़ों का टर्नओवर और कमीशन का खेल
श्रवण विश्नोई साल 2023 से इस काले धंधे में लिप्त है. वह अलग-अलग राज्यों से फर्जी सिम कार्ड और किराये के बैंक खाते लाकर गैंग को उपलब्ध कराता था. ठगी की राशि इन खातों में आने के बाद वह उसे कैश करवाता था और अपना हिस्सा काटकर बाकी रकम 'यूएसडीटी' (डिजिटल करेंसी) के माध्यम से दक्षिण भारत की गैंग को भेज देता था. हाल ही में उन्होंने तमिलनाडु के एक 72 वर्षीय बुजुर्ग से 8.70 लाख रुपये की ठगी की थी. पुलिस ने आरोपियों के पास से 6 फर्जी सिम और 3 मोबाइल जब्त किए हैं. फिलहाल कोर्ट ने दोनों को 5 दिन के रिमांड पर भेजा है जिससे कई और बड़े राज खुलने की उम्मीद है.
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