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Kaila Devi Lakhi Mela: कैला देवी लक्खी मेले में उमड़े श्रद्धालु, काली सिल नदी में स्नान मात्र से धुल जाते हैं सारे पाप!

Karauli Lakhi Mela: मान्यता है कि चमात्कारिक मां कैला देवी के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालु अगर बगैर स्नान करें लौट जाते हैं, तो उनकी यात्रा अधूरी माना जाती है. कहा जाता है पवित्र काली सिल नदी में स्नान मात्र से सारे पाप धुल जाते हैं. 

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Kaila Devi Lakhi Mela: कैला देवी लक्खी मेले में उमड़े श्रद्धालु, काली सिल नदी में स्नान मात्र से धुल जाते हैं सारे पाप!
मां कैला देवी दरबार, करौली

राजस्थान के करौली में स्थित मां कैला देवी के दरबार में चैत्र महीने में लगने वाला प्रसिद्ध लक्खी में मेले में श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं. राजस्थान ही नहीं, पूरे भारत में प्रसिद्ध मां कैला देवी का दरबार में चैत्र नवरात्रि के मौके पर लक्खी मेला लगता है. मेले की मान्यता इतनी है कि श्रद्धालुओं को आने में आतुर कर देता है. 

मान्यता है कि चमात्कारिक मां कैला देवी के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालु अगर बगैर स्नान करें लौट जाते हैं, तो उनकी यात्रा अधूरी माना जाती है. कहा जाता है पवित्र काली सिल नदी में स्नान मात्र से सारे पाप धुल जाते हैं. 

श्रद्धालु ढोल और नगाड़े बजाते और नाचते हुए पहुंचते हैं मां के दरबार

मां कैला देवा के दरबार में श्रद्धालु ढोल और नगाड़े बजाते और नाचते हुए पहुंचते हैं. हजारों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचते ही भक्ति रस में सराबोर होकर नाचने लगते हैं. कहा जाता है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु बरबस ढोल और नगाड़ों की धुन पर मलंग होकर नाचने को मजबूर हो जाते हैं.

मां कैला देवी के दरबार में साल में एक बार चैत्र मास में लगता है लक्खी मेला

देश और दुनिया मे अपने चमत्कार के लिए प्रसिद्ध मां कैला देवी का दरबार में साल भर में एक बार चैत्र मास के लक्खी मेले का आयोजन होता है. मां कैला देवी के दरबार में मैया के चौखट पर दर्शन के लिए हर साल भारी संख्या में लोग पहुंचते हैं और काली सिल नदी में डुबकी लगाकर पापों को धुलने आते हैं.

दरबार में पहुंचते ही 1 दिन का विश्राम करना श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है

गौरतलब है मां कैला देवी दरबार में परंपरा है कि दरबार में पहुंचते ही 1 दिन का विश्राम करना श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है और काली सिल नदी में स्नान करने के बाद यात्रा पूरी मानी जाती है. अपने समस्त पापों से मुक्ति के लिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं में काली सिल की तीर पर डुबकी लगाने की होड़ लग जाती है.

लक्खी मेले में काली सिल नदी में बड़ी संख्या डुबकी लगाने पहुंचते हैं श्रद्धालु

कहा जाता है कि मां कैला देवी दरबार में लगने वाले लक्खी मेले में पहुंचने वाले बच्चे, बूढ़े और जवान पुरुष और महिलाएं काली सिल नदी में बड़ी संख्या डुबकी लगाते हुए देखे जाते हैं. डुबकी लगाने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि डुबकी लगाने के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि  भूल-चूक में उनके हाथों हुए सभी पाप कट गए हैं.

ये भी पढ़ें-Chaitra Navratri 2024: शक्तिपीठ जीणधाम में लक्खी मेला शुरू, 9 दिनों तक मां जीण भवानी का होगा विशेष श्रृंगार

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