Rajasthan News: बाबा श्याम के वार्षिक लक्खी मेले (Annual Phalguna Mela 2026) के आगाज से पहले ही राजस्थान की सीकर पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है. 21 फरवरी से 28 फरवरी तक चलने वाले इस 'महाकुंभ' में लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाटूश्यामजी पुलिस और डीएसटी (DST) सीकर ने संयुक्त रूप से एक बड़ा 'सफाई अभियान' शुरू किया है. इस जांच अभियान के तहत पुलिस ने बुधवार रात बड़ी कार्रवाई करते हुए 11 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है और 7 लावारिस मोटरसाइकिलों को जब्त किया है.
होटल-धर्मशालाओं पर पैनी नजर
मेले में भीड़ का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय न हो सकें, इसके लिए पुलिस प्रशासन ने 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है. पुलिस की अलग-अलग टीमों ने कस्बे के होटलों, ढाबों और धर्मशालाओं में सरप्राइज चेकिंग की है. जांच के दौरान अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर संदिग्धों को हिरासत में लिया गया. खाटूश्यामजी थानाधिकारी पवन चौबे ने जानकारी दी कि मेले की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा.
मेले में आने वाले भक्त ध्यान दें
अगर आप भी फाल्गुन मेले में शामिल होने का प्लान बना रहे हैं, तो प्रशासन की इन बातों का ध्यान जरूर रखें.
- किसी भी होटल या धर्मशाला में रुकने के लिए अपना आधार कार्ड या वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है.
- केवल पुलिस वेरिफिकेशन वाले होटलों या गेस्ट हाउस में ही ठहरें.
- अपने आसपास कोई भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति दिखे तो तुरंत पुलिस को सूचित करें.
क्यों खास है यह मेला?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन माह की शुक्ल एकादशी को ही बर्बरीक (बाबा श्याम) ने अपना शीश भगवान कृष्ण को दान किया था. इसीलिए इस महीने में दर्शन का विशेष महत्व है. भक्त मानते हैं कि इस दौरान बाबा श्याम साक्षात खाटू में विराजमान रहते हैं. इसे 'लक्खी मेला' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें लाखों की तादाद में भक्त (लखदातार के दरबार में) आते हैं. इन 8 दिनों में श्याम भक्त रींगस से खाटू धाम तक (लगभग 17-18 किमी) पैदल यात्रा करते हैं और हाथों में 'निशान' लेकर चलते हैं. दर्शन से पहले भक्त श्याम कुंड में पवित्र डुबकी लगाते हैं. मेले के दौरान मंगला आरती और शृंगार आरती का दृश्य बहुत दिव्य होता है. बाबा का नित्य नया और भव्य शृंगार किया जाता है.
पहली बार 11 के बजाय 8 दिन का मेला
पिछले 5 सालों में ऐसा पहली बार हो रहा है जब प्रशासन ने मेले की अवधि कम की है. पहले मेला 10-12 दिन चलता था, लेकिन इस बार प्रशासन और मेला कमेटी ने एक स्वर में इसे 8 दिन तक सीमित रखने पर सहमति जताई है. मंगलवार (20 जनवरी) को सीकर जिला कलेक्टर मकुल शर्मा की अध्यक्षता में हुई अहम बैठक में मेला अवधि घटाने और सुरक्षा के 5 बड़े बदलावों पर मुहर लग गई है.
इस बार दर्शन में होंगे ये 5 बड़े बदलाव
भीड़ नियंत्रण और भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए पुलिस ने इस बार 'जीरो रिस्क' प्लान बनाया है. अगर आप जा रहे हैं, तो ये 5 नियम जरूर जान लें:-
- दर्शन के बाद भगदड़ न हो, इसलिए निकास के अब 2 नहीं बल्कि 3 रास्ते होंगे. भीड़ को गुवाड़ चौक की तरफ भी डायवर्ट किया जाएगा.
- अक्सर भक्त जल्दी दर्शन के चक्कर में लाइन फांदते थे, जिससे व्यवस्था बिगड़ती थी. इस बार बैरिकेडिंग की हाइट काफी बढ़ा दी जाएगी ताकि कोई भी लाइन जंप न कर सके.
- 75 फीट ग्राउंड के एंट्रेंस पर श्रद्धालुओं की लाइन के ऊपर से एक नया ओवरब्रिज बनाया जाएगा.
- अब सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि रींगस और मंडा रोड पर भी CCTV से नजर रखी जाएगी.
- एकादशी के दिन होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए इस बार शहर के बाहरी इलाकों में नए पार्किंग स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, ताकि जाम की स्थिति न बने.
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