
Udaipur Biological Park: इंसान पूजा-पाठ या अपने हेल्थ को लेकर उपवास रखते हैं. लेकिन आपने शायद ही सुना होगा कि वन्यजीव भी उपवास रखते हैं. वन्यजीव जो कभी भी भूखे नहीं रह सकते वह भी उपवास रखते हैं. यह सुनकर आप भी सोच में पड़ गए होंगे. लेकिन यह सच है. उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में वहां रह रहे वन्यजीव मंगलवार का उपवास रखते हैं. आपको बता दें, देश के सभी बायोलॉजिकल पार्को और चिड़ियाघरों में रहने वाले वन्यजीव भी 'उपवास' करते हैं.
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देशानुसार देशभर के जैविक उद्यानों (बायोलॉजिकल पार्क) और चिड़ियाघरों में हर सप्ताह एक दिन वन्य जीवों की फास्टिंग कराई जाती है. यह व्यवस्था विशेष तौर पर पार्क में रहने वाले मांसाहारी जीवों के लिए है. बाकी दिनों में भी केवल एक समय ही शाम के वक्त का भोजन दिया जाता है.
सालों से चला आ रहा उपवास का नियम
उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में हर मंगलवार वन्यजीवों का 'उपवास' का दिन होता है. दरअसल केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देशानुसार सज्जनगढ़ में बायोलॉजिकल पार्क की शुरुआत के पहले से ही यहां रखे गए वन्यजीवों की फास्टिंग के लिए मंगलवार का दिन निर्धारित है क्योंकि बायोलॉजिकल पार्क बनने से पहले उदयपुर के गुलाब बाग चिड़ियाघर में यह व्यवस्था कायम थी. जिसे 2015 में सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क का स्वरूप देने के बाद भी नियमित रखा गया.

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उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्कमें 23 प्रजातियों के वन्यजीव हैं इनमे मांसाहारी, शाकाहरी,रेप्टाइल आदि इनमे खास तौर पर टाइगर, एशियाटिक लॉयन, पेंथर, भालू,लोमड़ी, सांभर, चीतल सहित अन्य कई प्रजातियों के जीव है. उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में फास्टिंग डे पर होते हैं.
वन्य जीवों की फास्टिंग के दिन बायोलॉजिकल पार्क में संबंधित वन्य जीवों की कैज, डिस्प्ले एरिया, ऑफ डिस्प्ले एरिया आदि की साफ सफाई सहित रखरखाव संबंधी अन्य कार्य किए जाते हैं. नियमित दिनों में यह कार्य होना संभव नहीं होता, इसलिए आमतौर पर रखरखाव संबंधी ज्यादातर कार्य इसी दिन होते हैं.
क्यों रखवाया जाता है उपवास
सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. हिमांशु व्यास के अनुसार बायोलॉजिकल पार्क और चिडियाघरों में रहनेवाले वन्य जीवों की फास्टिंग की व्यवस्था केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के निर्देशानुसार है.दरअसल, वन्य जीव जब जंगल में होते हैं, तब उन्हें रोजाना शिकार नहीं मिलता. वन्यजीवों को जंगल में नहीं मिलता है रोजाना शिकार, शारीरिक प्रकृति का हिस्सा है कि वे एक से ज्यादा दिन भूखे रह सकते हैं. यही वजह है कि उनकी सेहत को ध्यान में रखते हुए उन्हें हर सप्ताह एक दिन फीड नहीं दिया जाता है. कभी कभी वन्य जीवों के सकर्मित व बीमार होने की स्थिति में भी ऐसा किया जाता है कि उन्हें फीड देना बंद करना पड़ता है. इसलिए यहां भी परहेज जरूरी है.
वन्यजीवों की सेहत और बायोलॉजिकल पार्क के प्रबंधन दोनों ही दृष्टि से सप्ताह में एक दिन की फास्टिंग जरूरी है.जब जानवर जंगल में रहता है तो शिकार के लिए घूमते रहते हैं, जिससे वह फिजिकली फिट रहते हैं, जबकि पार्क में उतना मूवमेंट नहीं हो पाता. ऐसे में फीडिंग में एक दिन का ब्रेक देना उनकी सेहत के लिए अच्छा होता है. इसके अलावा इस दिन पार्क बंद रहता है तो विजिटर्स भी नहीं होते. ऐसे में कैज व डिस्प्ले एरिया की मेंटेनेंस भी हो जाती है.
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