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"मौर्य और गुप्त शासन में नगर निगम का चुनाव हुआ था", राज्यपाल बोले- यही हमारे देश का इतिहास

Rajasthan Governor Haribhau Bagde: राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि हमारे देश का लोकतंत्र सबसे बड़ा और अच्छा है, यहां सहिष्णुता है. भारत के नागरिक सभ्य भी हैं और इसी वजह से लोकशाही बढ़ रही है.

"मौर्य और गुप्त शासन में नगर निगम का चुनाव हुआ था", राज्यपाल बोले- यही हमारे देश का इतिहास
राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े

National Voters Day: आज (रविवार) 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम हुआ. निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाता जागरूकता प्रदर्शनी लगाई गई. कार्यकम में राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े, मुख्य सचिव वी श्रीनिवास, राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. राज्यपाल ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और मतदाताओं को शपथ दिलाई. इस दौरान एसआईआर में उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिला कलेक्टरों और ईआरओ को सम्मानित किया गया. राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागड़े ने कहा कि आज के दिन संविधान लागू होने से एक दिन पहले 1950 में निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई. इसका उद्देश्य था कि हमारे यहां स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया का निवास हो. देश में करीब 100 करोड़ मतदाता हैं. राजस्थान में 5 करोड़ से अधिक मतदाता है. 

उन्होंने कहा कि ईवीएम की बजाय बैलेट पेपर से चुनाव की मांग आती है. लेकिन इसके पीछे वजह समझ नहीं आती. बैलेट पेपर से बहुत ज्यादा फर्जीवाड़ा होता था. ऐसी बहुत शिकायतें पहले हुई है और इसी के चलते ईवीएम से मतदान शुरू हुआ. अब ईवीएम का विरोध करने वाले सिद्ध नहीं कर सकते. जब सिद्ध नहीं कर सकते, तो चर्चा करना भी देशहित में नहीं है. उन्होंने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को सही बताते हुए कहा कि इससे खर्चा कम होगा और पैसा विकास में खर्च होगा. 

पत्रकारिता के अनुभव भी साझा किए

उन्होंने कहा, "मैं शुरु में पत्रकारिता का काम करता था. साल 1967 में असम में ऐसी बात आई. डिब्रूगढ़ विधानसभा में हजारों नाम बाहर के आए थे, इस तरह की खबर भी अखबार में आई थीं. हमारे देश का लोकतंत्र सबसे बड़ा और अच्छा है, यहां सहिष्णुता है. भारत के नागरिक सभ्य भी हैं और इसी वजह से लोकशाही बढ़ रही है. मौर्य और गुप्त राज्यों के वक्त भी पाटलिपुत्र में नगर निगम था और उसका चुनाव हुआ था. तब 30 सदस्य चुने गए थे, अच्छी व्यवस्था के लिए कुछ कमेटियां भी बनी थी. ये सब हमारा इतिहास है. पंडित नेहरू ने अपनी किताब में यह लिखा है."

बीएलओ ने ना मर्जी से नाम जोड़े और ना हटाए- राज्यपाल

उन्होंने बीएलओ के काम की तारीफ करते हुए कहा, "बीएलओ ने खुद के मन से मतदान जोड़े नहीं, हटाते नहीं. ऐसा भी होता था कि वोटर गांव में होता नहीं था, लेकिन फिर भी उसका नाम लिस्ट में होता था. ऐसे बहुत से नाम रहते थे. इसके साथ-साथ जो अपने देश के नागरिक नहीं है. लेकिन व्यवसाय या अन्य किसी काम से व्यवसाय के लिए आए हैं. ऐसे बहुत लोगों के नाम लिस्ट में डाले हुए थे."

राजसमंद कलेक्टर ने बताया कि कैसे हुआ SIR पर काम

इस मौके पर राजसमंद जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा ने भी अपने अनुभव साझा किया. उन्होंने कहा, "हम रोज कार्यों की समीक्षा करते थे. हमने रोज वीसी करने का फैसला लिया. सभी कार्मिकों ने कहा कि वीसी करेंगे तो काम कब करेंगे. मैंने कहा कि हम शाम में करेंगे, आपके काम के समय के बाद. इससे हमें एसआईआर में बड़ी सफलता मिली. लोकतंत्र जनसहभागिता से ही साकार होता है. यह एसआईआर पारदर्शिता और निष्पक्षता का उदाहरण बना, इसलिए दिल्ली में वैश्विक स्तर पर इसे मॉडल के रूप में रखा गया." 

वहीं, बस्सी एसडीएम डॉ. गरिमा शर्मा ने बताया कि राजस्थान में बीएलओ ने बेहतरीन काम किया. इस एसआईआर को लोकतांत्रिक उत्सव की तरह मनाया गया. सभी बीएलओ और सुपरवाइजर की निगरानी की गई और उन्हें प्रोत्साहित किया गया.

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