Rajasthan News: राजस्थान के जालौर में 15 गांवों की महिलाओं पर स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर लगाए गए कथित प्रतिबंध मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है. NHRC ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए जालौर कलेक्टर को नोटिस जारी करके तलब किया है. वहीं, मानवाधिकार के नोटिस को लेकर कलेक्टर ने बताया कि प्रशासन ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच की और यह सुनिश्चित किया कि किसी भी महिला पर किसी प्रकार का सामाजिक या पंचायत स्तर का दबाव लागू नहीं है.
समाज की पंचायत ने सुनाया था फैसला
महिलाओं के स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का मामला भीनमाल उपखंड क्षेत्र की सुंदर पट्टी चौधरी समाज पंचायत से जुड़ा हुआ है. पंचायत में कथित रूप से निर्णय लिया गया था कि महिलाएं और बेटियां कैमरे वाले स्मार्टफोन का उपयोग नहीं करेंगी. इस फैसले को लेकर क्षेत्र में काफी विवाद और चर्चा हुई थी. इस मामले की मानवाधिकार आयोग में शिकायत दी गई थी, जिसमें महिलाओं के मौलिक अधिकारों और मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया गया था.
शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए जालौर जिला प्रशासन से जवाब तलब किया. इस बारे में जालौर कलेक्टर डॉ. प्रदीप गावंडे ने बताया कि जांच के दौरान यह सामने आया कि चौधरी समाज के पंचों द्वारा लिया गया निर्णय बाद में वापस ले लिया गया है. इस संबंध में मानवाधिकार आयोग से प्राप्त नोटिस का समय पर जवाब भेज दिया गया है.
प्रशासन के दखल के बाद पंचों ने वापस लिया निर्णय
जब चौधरी समाज की पंचायत द्वारा महिलाएं और बहन-बेटियां के स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का मामला सामने आया तो जालौर जिला प्रशासन और चौधरी समाज दोनों सुर्खियों में बना रहा. इस निर्णय को लेकर कई सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने कड़ा विरोध किया. मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप और जिला प्रशासन की सक्रियता के बाद समाज के पंचों ने अपने पूर्व निर्णय को वापस ले लिया, जिससे फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है.
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कोई भी पंचायत या सामाजिक समूह महिलाओं के व्यक्तिगत अधिकारों, तकनीक के उपयोग या आवागमन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता है. जिला प्रशासन ने संकेत दिए कि भविष्य में इस तरह के किसी भी फैसले की पुनरावृत्ति होती है, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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