
राजस्थान विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां पूरे जोरों पर है. भाजपा परिवर्तन यात्रा के जरिए पूरे प्रदेश को साध रही है तो कांग्रेस अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए जनसंपर्क कर रही है. इस बीच सरहदी जिले जैसलमेर की पोखरण विधानसभा सीट को साधने को कोशिश भाजपा-कांग्रेस दोनों दल कर रहे हैं. राजपूत बहुल्य इस सीट से बीते दिनों भाजपा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों परिवर्तन यात्रा का शुभारंभ कराया था. अब 9 सितंबर (शनिवार) को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रामदेवरा आ रहे हैं. वो बाबा रामदेव का दर्शन कर कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश दे सकते हैं. रामदेवरा में मेला भी इसी महीने शुरू होने वाला है. इस इलाके में बाबा रामदेव पर लाखों लोगों की आस्था है. सीएम गहलोत स्वयं यहां हर साल आते रहते हैं.

सीएम गहलोत के रामदेवरा दौरे का कार्यक्रम
सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शनिवार 9 सितंबर को लोक देवता बाबा रामदेव की समाधि के दरबार में माथा टेकने रामदेवरा आ रहे हैं. सीएम गहलोत 9 सितंबर को सुबह 11 बजे रामदेवरा पहुंचेंगे और दर्शन करने के बाद वापस 12 बजे फलोदी के लिए निकल जाएंगे. सीएम का यह दौरा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सभा के प्रभाव को भाँपने के लिए है. साथ ही इशारों -इशारों में सब कुछ समझाने वाले सीएम गहलोत विधानसभा चुनाव को लेकर कोई संदेश देने के लिए रामदेवरा आ रहे हैं.
2018 में महंत और मुस्लिम धर्मगुरु थे आमने-सामने
पोखरण सीट से 2018 के चुनाव में महंत और मुस्लिम धर्म गुरु आमने-सामने थे. भाजपा से तारातरा मठ के महंत प्रतापपुर महाराज तो कांग्रेस की ओर से तत्कालीन मुस्लिम धर्म गुरु गाजी फकीर के बड़े बेटे शाले मोहम्मद को मैदान में उतारा था.
इस चुनावी रण में कांटे की टक्कर में शाले मोहम्मद 872 मतों से जीतकर विधायक बने.
कांग्रेस ने उन्हे बड़े तोहफ़े के रूप में कैबिनेट मंत्री का पद दिया. माना जा रहा है कि इस बार भी कांग्रेस से शाले मोहम्मद को ही टिकट मिलेगी. वहीं पिछले दिनों हुई राजनाथ सिंह की सभा में महंत को मंच पर स्थान मिलना और हर बड़े नेताओं के सम्बोधन में उनका जिक्र होने से उनकी दावेदारी की चर्चा है.

पिछली बार कांग्रेस ने दोनों सीटों पर हासिल की थी जीत
2008, 2013 और 2018 में रक्षा मंत्री ने जैसलमेर मुख्यालय पर सभा कर चुनावी माहौल तैयार किया था. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भाजपा ने चौथी बार विधानसभा चुनाव में जैसलमेर भेजा है. जिसका प्रमुख कारण यहां की दोनों सीटों का राजपूत बाहुल्य होना है.
2008 और 2013 में भाजपा के छोटू सिंह जैसलमेर से दो बार विधायक बने थे. हालांकि 2018 में जैसलमेर व पोखरण की दोनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा रहा था. अब देखने की बात तो यह होगी कि सीएम गहलोत के दौरे के बाद पोखरण की राजनीति में क्या परिवर्तन आता है?