Rajasthan News: राजस्थान में सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 32 हजार 526 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. यह राशि वर्ष 2023-24 के मुकाबले 53 प्रतिशत अधिक है. इसे राज्य के स्वास्थ्य ढांचे के लिए अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय विस्तार माना जा रहा है. चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग को 12 हजार 195 करोड़ रुपये, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को 4 हजार 853 करोड़ रुपये, परिवार कल्याण विभाग को 1 हजार 798 करोड़ रुपये, चिकित्सा शिक्षा विभाग को 2 हजार 995 करोड़ रुपये और आयुष को 787.67 करोड़ रुपये दिए गए हैं.
डिजिटल हेल्थ में तेजी
राजस्थान डिजिटल स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब तक 6.52 करोड़ आभा आईडी जारी की जा चुकी हैं. ई-संजीवनी टेलीमेडिसन सेवा से 20.33 लाख मरीजों को घर बैठे परामर्श मिला है. इससे दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को विशेषज्ञ डॉक्टरों तक पहुंच आसान हुई है.
बड़े अस्पतालों का विस्तार
जयपुर में स्थित जे.के. लोन अस्पताल में 500 बेड क्षमता का आईपीडी टॉवर बनाया जाएगा. यहां पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग की स्थापना भी प्रस्तावित है. इसके साथ ही आरयूएचएस हॉस्पिटल में 200 बेड का पीडियाट्रिक आईपीडी और निओनेटल आईसीयू विकसित किया जाएगा. मेडिकल कॉलेजों के सुदृढ़ीकरण के लिए डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज, रवीन्द्रनाथ टैगोर मेडिकल कॉलेज, सरकारी मेडिकल कॉलेज कोटा, जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, क्रिटिकल केयर और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा.
गांव से शहर तक मजबूत नेटवर्क
प्रदेश में 267 अस्पताल, 849 सीएचसी, 2 हजार 875 पीएचसी और 15 हजार 292 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं. कई पीएचसी और सीएचसी को अपग्रेड कर उप जिला अस्पताल और आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाया जाएगा.
राज सुरक्षा योजना के तहत 24 घंटे क्रिटिकल केयर कमांड सेंटर, सीएचसी स्तर पर ईसीजी और टेली ईसीजी सुविधा तथा हाइवे पर एम्बुलेंस तैनात होंगी. ट्रोमा सेवाओं के लिए 150 करोड़ रुपये रखे गए हैं. दुर्घटना में मृत व्यक्ति के पार्थिव शरीर को घर तक निःशुल्क पहुंचाने के लिए मोक्ष वाहिनी योजना शुरू होगी.
आयुष्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर खास फोकस
मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना में 2 हजार 179 पैकेज के तहत 25 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध है. 1 करोड़ 36 लाख परिवार पंजीकृत हैं और 2025-26 में 15 लाख से ज्यादा लोग लाभान्वित हुए. अब असहाय और लावारिस रोगी भी योजना में शामिल होंगे.
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ बनेगा. जिला मुख्यालयों पर मानसिक स्वास्थ्य सेल और अस्पतालों में मनोचिकित्सक व काउंसलर की नियुक्ति होगी. राज ममता प्रोग्राम के जरिए अवसाद और आत्महत्या रोकथाम पर विशेष काम किया जाएगा.
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