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This Article is From May 16, 2025

Rajasthan: ऐसा गांव जहां 78 साल बाद भी गंदा पानी पीने को हैं मजबूर, नसीब से मिलता नदी का मटमैला पानी

छिपौल गांव की यह स्थिति उन वादों की पोल खोलती है जो हर बार ग्रामीणों से किए जाते हैं, यहां के निवासीयों ने आज तक शुद्ध पानी की सुविधा नहीं देखी.

Rajasthan: ऐसा गांव जहां 78 साल बाद भी गंदा पानी पीने को हैं मजबूर, नसीब से मिलता नदी का मटमैला पानी

राजस्थान के बारां जिले का एक ऐसा गांव जिसकी तस्वीर विकास की असल सच्चाई बयां कर रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग-27 से महज चार-पांच किलोमीटर दूरी पर स्थित यह गांव आज भी पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है. यहां के ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए पास बह रही कुन्नू नदी में झिरिया बनाकर गंदा और मटमैला पानी लाना पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार गांव में करीब 30 परिवार रहते हैं, लेकिन किसी के हिस्से में अब तक स्वच्छ जल नहीं आया. बरसों पहले लगाए गए दो हैंडपंप भी सालों से बंद पड़े हैं. ऐसे में ग्रामीण महिलाओं को नदी में बनी झिरियों से सिर पर मटके रखकर कठिन और फिसलन भरे पहाड़ी रास्तों से होकर पानी लाना पड़ता है.

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शाहाबाद उपखंड के छिपौल गांव में बारिश के दिनों में स्थिति और भी विकराल हो जाती है. कुन्नू नदी में उफान आने से लोग करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित सरदारों के कुए' से पानी लाने को मजबूर हो जाते हैं, वह भी पगडंडी वाले कीचड़ से भरे रास्तों से गुजरते हुए. गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे भी इसी नदी का पानी पीने को मजबूर हैं.

यहां के निवासीयों ने आज तक शुद्ध पानी की सुविधा नहीं देखी. कई बार शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. चुनाव के वक्त वादों की झड़ी लगती है, पर जीत के बाद कोई मुड़कर नहीं देखता.

छिपौल गांव की यह स्थिति न केवल विकास योजनाओं पर सवाल उठाती है, बल्कि उन वादों की भी पोल खोलती है जो हर बार ग्रामीणों से किए जाते हैं, लेकिन निभाए नहीं जाते. आज भी यहां के लोग 78 साल बाद भी आजादी की असली रोशनी से कोसों दूर हैं.

बारां में कुल 197 गांवों में पेयजल की समस्या

वहीं जलजीवन मिशन के अधिकारी व बारां के पीएचईडी के एस ई ने बताया कि बारां जिले में कुल 197 गांवों में पेयजल की समस्या है. लेकिन जलजीवन मिशन के तहत कुल 250 करोड़ की योजना के तहत 162 गांवो में कार्य चल रहा है जिसके तहत 105 गांवों में काम पूरा हो चुका है, बाकि का कार्य अगस्त माह तक पूर्ण कर लिया जायेगा. लेकिन शाहाबाद क्षेत्र का यह गांव इनमे शामिल नहीं है.

अब कुल 2800 करोड़ रुपये की परवन पेयजल योजना के तहत इस गांव को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा. लेकिन इसको पूर्ण होने पर 2 साल से अधिक का समय लगेगा. हालांकि वहां हैण्डपम्प लगे हुए हैं, लेकिन वॉटर लेवल नीचे चला गया है. हालांकि पेयजल की व्यवस्था के लिए टैंकर से पानी सप्लाई की जाती है.

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