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Rajasthan: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का विवाद, ट्रस्ट में बदलने पर टीकाराम जूली ने जताई आपत्ति

दरअसल मौजूदा कन्वीनर दीनदयाल कुमावत राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को देवस्थान विभाग में पंजीकृत कराने की तैयारी किए जाने की बात सामने आई है. इस कदम को लेकर एसोसिएशन के भीतर और बाहर दोनों स्तर पर विरोध दर्ज कराया जा रहा है.

Rajasthan: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का विवाद, ट्रस्ट में बदलने पर टीकाराम जूली ने जताई आपत्ति

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन में पिछले कुछ समय से जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है. एसोसिएशन को ट्रस्ट में परिवर्तित करने की तैयारी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. सदन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दावा किया है कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन, जो एक विधिवत पंजीकृत सहकारी संस्था है और राजस्थान सहकारी समितियां अधिनियम तथा राजस्थान खेल अधिनियम 2005 के तहत संचालित होती है, उसे बिना वैधानिक अनुमति ट्रस्ट में बदलने का प्रयास किया जा रहा है.

दरअसल मौजूदा कन्वीनर दीनदयाल कुमावत राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को देवस्थान विभाग में पंजीकृत कराने की तैयारी किए जाने की बात सामने आई है. इस कदम को लेकर एसोसिएशन के भीतर और बाहर दोनों स्तर पर विरोध दर्ज कराया जा रहा है. आरसीए के सीए श्याम अग्रवाल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आयकर में रिबेट प्राप्त करने के लिए किसी संस्था का ट्रस्ट के रूप में पंजीकरण आवश्यक होता है. उनके अनुसार यह प्रक्रिया वैधानिक दायरे में है.

किसी भी प्रकार का परिवर्तन विधिसम्मत नहीं माना जा सकता

वहीं आरसीए के पूर्व पदाधिकारी डॉ. सुमित गर्ग ने इस कदम पर गंभीर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि आरसीए की सर्वोच्च निकाय उसकी साधारण सभा है और संस्था से जुड़े किसी भी नीतिगत, संरचनात्मक या संपत्ति संबंधी निर्णय का अधिकार केवल साधारण सभा को है. उन्होंने कहा कि साधारण सभा की स्वीकृति, राज्य सरकार और पंजीयक सहकारी समितियों की अनुमति के बिना किसी भी प्रकार का परिवर्तन विधिसम्मत नहीं माना जा सकता. उन्होंने यह भी कहा कि सभी खेल संघ राजस्थान खेल अधिनियम के तहत संचालित होते हैं.

देवस्थान विभाग की ओर से एक विज्ञप्ति जारी की गई है

मामले में यह भी सामने आया है कि देवस्थान विभाग की ओर से एक विज्ञप्ति जारी की गई है. दस्तावेजों के आधार पर आरोप है कि दीनदयाल कुमावत ने राजस्थान सार्वजनिक न्यास अधिनियम 1959 के तहत आरसीए को सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत कराने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया. आवेदन में स्वयं को कार्यवाहक प्रमुख प्रन्यासी दर्शाते हुए आरसीए की चल और अचल संपत्तियों, बैंक खातों और अन्य परिसंपत्तियों को ट्रस्ट की संपत्ति के रूप में दर्शाने का उल्लेख किया गया है.

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