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This Article is From Mar 15, 2026

राजस्थान का किसान परिवार गोबर गैस से बना रहा खाना, LPG संकट के बीच पेश की मिसाल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच देश में एलपीजी गैस की किल्लत की खबरें आ रही हैं. ऐसे समय में राजस्थान के चूरू जिले का एक किसान परिवार गोबर गैस से रसोई चलाकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहा है.

राजस्थान का किसान परिवार गोबर गैस से बना रहा खाना, LPG संकट के बीच पेश की मिसाल

Rajasthan News: मिडिल ईस्ट में अमेरिका इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है. कई जगहों पर एलपीजी सिलेंडर की कमी की खबरें सामने आ रही हैं.

इसी बीच राजस्थान के चूरू जिले के पुनसीसर छोटा गांव से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है जहां एक किसान परिवार गोबर गैस से अपनी रसोई चला रहा है.

गोबर गैस से जल रही रसोई

चूरू जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में युवा किसान तेजपाल प्रजापत और बाबूलाल प्रजापत का परिवार बायोगैस प्लांट के जरिए खाना बनाता है. उनके घर में लगाया गया यह प्लांट पूरी तरह मवेशियों के गोबर से चलता है.

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परिवार के पास 6 से 7 मवेशी हैं जिनसे रोज करीब 120 किलो गोबर मिलता है. गोबर और पानी का घोल बनाकर प्लांट में डाला जाता है जिससे बनने वाली गैस से रोजाना करीब 8 से 10 घंटे तक चूल्हा जलता है.

चारा पकाने में भी हो रहा उपयोग

परिवार के सदस्य बताते हैं कि इस गैस से घर का खाना बनाने के साथ-साथ मवेशियों का चारा पकाने में भी मदद मिलती है. इससे एलपीजी सिलेंडर पर होने वाला खर्च लगभग खत्म हो गया है.

खेतों को मिल रही जैविक खाद

बायोगैस बनने के बाद जो घोल बचता है उसे सलरी कहा जाता है. तेजपाल और बाबूलाल का परिवार इसे खेतों में जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करता है. इससे यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक खाद की जरूरत कम हो गई है और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है.

महिलाओं को धुएं से मिली राहत

परिवार की महिला सदस्य द्रोपती देवी और गीता देवी बताती हैं कि पहले लकड़ी और थेपड़ी से खाना बनाना पड़ता था जिससे रसोई में बहुत धुआं होता था. अब गोबर गैस से चूल्हा जलने लगा है जिससे तेज आंच पर करीब आधे घंटे में खाना तैयार हो जाता है.

कम खर्च में बड़ा फायदा

परिवार ने अपने तीन घरों में मिनी बायोगैस प्लांट लगवाए हैं. एक प्लांट लगाने में करीब 6 हजार रुपये का खर्च आया. पहले हर महीने एलपीजी सिलेंडर पर एक हजार रुपये से ज्यादा खर्च होता था. अब यह खर्च लगभग खत्म हो गया है.

आत्मनिर्भरता की मिसाल बना परिवार

तेजपाल प्रजापत का कहना है कि अगर देश में लंबे समय तक गैस सप्लाई बंद भी हो जाए तो भी उनके घर की रसोई नहीं रुकेगी. चूरू का यह किसान परिवार बता रहा है कि गांवों में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग किया जाए तो ऊर्जा बचत जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है.

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