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This Article is From Aug 29, 2025

Rajasthan: सरकार के फैसले से जाएगी फर्जी दिव्यांग कर्मचारियों की नौकरी, मेडिकल बोर्ड फिर करेगा जांच

कार्मिक विभाग ने ऐसी जांच की शुरुआत में सबसे पहले उन कर्मचारियों के मेडिकल के लिए कहा है, जो पिछले 5 साल में सरकारी सेवा में शामिल हुए हैं.

Rajasthan: सरकार के फैसले से जाएगी फर्जी दिव्यांग कर्मचारियों की नौकरी, मेडिकल बोर्ड फिर करेगा जांच
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

Rajasthan News: फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले उजागर होने के बाद सरकार और ज्यादा सतर्क हो गई है. अब कार्मिक विभाग (DOP) ने राज्य सरकार के सभी विभागों में काम कर रहे दिव्यांग कर्मचारियों का फिर से मेडिकल कराने का आदेश दिया है. DOP के सचिव केके पाठक की तरफ से जारी किए गए सर्कुलर में सरकारी मेडिकल कॉलेज या सरकारी अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से दोबारा मेडिकल कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं. इसमें सबसे पहले पिछले 5 साल के दौरान सरकारी सेवा में शामिल हुए दिव्यांग कर्मचारियों का मेडिकल करने से शुरुआत होगी.

DOP के सचिव केके पाठक की तरफ से जारी सर्कुलर में साफ कहा गया है कि, यदि किसी मामले में सरकारी सेवा के लिए दिव्यांगता के निर्धारित पैरामीटर में कमी पाई जाती है तो इसकी सूचना DOP के साथ ही SOG को भी देनी होगी. कार्मिक सचिव ने कहा कि किसी भी मामले में दिव्यांगता का गलत  सर्टिफिकेट पेश किया जाना या फिर गलत प्रमाण पत्र जारी किया जाना मिलता है तो ऐसे मामलों के बारे में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी. कार्मिक विभाग के सचिव ने कहा कि कार्रवाई करने के लिए अनियमितता के बारे में ऐसे कर्मचारियों की सूचना कार्मिक विभाग के साथ एसओजी को भी देनी होगी.

दिव्यांग जनों की कैटेगरी और सर्टिफिकेट जचने के लिए प्रक्रिया भी तय की 

कार्मिक विभाग ने दिव्यांग कर्मचारी के सर्टिफिकेट जांचने और उनके फिर से मेडिकल कराने को लेकर जरूरी प्रक्रिया भी तय की है. DOP ने कहा है कि मेडिकल बोर्ड के एग्जामिनेशन के दौरान कर्मचारी की दिव्यांगता की स्थिति का भी जिक्र किया जाना चाहिए. यानी, उसकी दिव्यांगता स्थाई श्रेणी की है या नहीं? इसके साथ ही दिव्यांगता का स्तर कैसा है? इसका भी जिक्र होना चाहिए.

40 फ़ीसदी से कम दिव्यांगता की जानकारी कार्मिक विभाग ने अलग से मांगी

सरकारी सेवा में दिव्यांग श्रेणी में आरक्षण के लिए कम से कम 40 फीसदी दिव्यांग होना जरूरी होता है. ऐसे में अगर किसी कर्मचारी की दिव्यांगता 40 फ़ीसदी से कम है, तो उसकी जानकारी भी कार्मिक विभाग में अलग से मांगी है. DOP ने कहा कि, कर्मचारी की दिव्यांग ही नहीं है और अगर उसने गलत सर्टिफिकेट सरकार में दिया है तो ऐसे मामलों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए.

कार्मिक विभाग का मानना है कि, संभव है कि, जांच के दौरान शिथिलता बरती गई हो, या कर्मचारी ने अपने ही स्तर पर गलत सर्टिफिकेट दे दिया हो ऐसा भी देखने की जरूरत है कि किसी मामले में कर्मचारियों ने खुद की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को भेज कर गलत पहचान के जरिए दिव्यांग सर्टिफिकेट हासिल कर लिया हो.

पहले 5 साल में सरकारी सेवा में शामिल होने वालों की जांच 

कार्मिक विभाग ने कहा है कि दिव्यांगजन के लिए आरक्षण का प्रावधान उनकी स्थिति और चुनौतियों को देखते हुए किया जाता है और यदि किसी व्यक्ति की तरफ से गलत प्रमाण पत्र सर्टिफिकेट देकर अपॉइंटमेंट या प्रमोशन हासिल किया जाता है, तो यह न केवल वास्तविक दिव्यांग के अधिकारों का हनन है बल्कि आपराधिक कृत्य भी है. कार्मिक विभाग ने ऐसी जांच की शुरुआत में सबसे पहले उन कर्मचारियों के मेडिकल के लिए कहा है, जो पिछले 5 साल में सरकारी सेवा में शामिल हुए हैं.

जरूरी पैरामीटर अपनाने के निर्देश

कार्मिक विभाग ने कर्मचारियों की गलत पहचान रोकने के लिए जरूरी पैरामीटर अपनाने के निर्देश दिए हैं. विभाग ने कहा है कि मेडिकल जांच के समय पूरी सतर्कता बरती जानी जरूरी है. इसके लिए जो कर्मचारी सर्टिफिकेट बनवाने और लेने आ रहा है, तो रजिस्टर में इसका प्रमाण पत्र जारी करते समय कर्मचारी के पूरे दस्तखत, हिंदी और अंग्रेजी में होने चाहिए. अगर कोई कर्मचारी संक्षिप्त दस्तखत करना चाहता है तो वह कर सकता है, लेकिन पूरे दस्तखत करना भी जरूरी होगा.

कर्मचारियों के फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन के भी निर्देश

इसके साथ ही कर्मचारियों के फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन के भी निर्देश दिए गए हैं. मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने से पहले उसके एग्जामिन करते वक्त उसका सिस्टम इंटीग्रेटेड हाई रेजोल्यूशन फोटोग्राफ खिंचवाने की व्यवस्था करने के लिए भी कार्मिक विभाग ने कहा है. इसके साथ ही DOP ने कहा है कि जिस विभाग का कर्मचारी है, उसका एक अधिकारी भी मेडिकल टेस्ट के समय वहां जरूरी रूप से मौजूद रहे.

अपने सर्कुलर के साथ कार्मिक विभाग ने मेडिकल एंड हेल्थ डायरेक्टर के दो पुराने सर्कुलर भी साथ में अटैच किए हैं, तो मेडिकल एजुकेशन डिपार्मेंट की तरफ से दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश को लेकर तय मानकों और सावधानियों का ज़िक्र भी किया है. 

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