
Rajasthan: राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे ने कहा है कि भारत ज्ञान-विज्ञान में आरंभ से ही समृद्ध रहा है और विश्वभर में भारत की ज्ञान परंपरा श्रेष्ठ रही है. राज्यपाल बागड़े ने बुधवार (5 मार्च) को जयपुर में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के जयपुर क्षेत्रीय केंद्र के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी शिक्षा पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया. अपने संबोधन में राज्यपाल ने छात्रों से कहा कि उन्हें पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अलावा भी पढ़ना चाहिए और जीवन से संंबंधित, तथा नित नए हो रहे बदलावों के बारे में जानने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए.
राज्यपाल बागडे ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में गुरुत्वाकर्षण के बारे में न्यूटन की खोज से बहुत पहले से ही जानकारी थी. उन्होंने कहा कि वेदों में इसका उल्लेख मिलता है. राज्यपाल ने कहा, "भारत की ज्ञान परंपरा विश्व में श्रेष्ठ है. भारत ने सारे विश्व को दशमलव की व्यवस्था दी. न्यूटन ने दुनिया को गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत बहुत बाद में दिया. भारत में इसका उल्लेख वेदों में बहुत पहले से ही है."
उन्होंने कहा कि भारत के ऐतिहासिक ग्रंथों में कई आविष्कारों का उल्लेख मिलता है. राज्यपाल ने कहा कि महर्षि भारद्वाज ने अपने एक ग्रंथ में वायुयान के बारे में लिखा था. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 50 साल पहले इस ग्रंथ को प्राप्त करने के लिए एक पत्र लिखा था.
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे जी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, क्षेत्रीय केन्द्र, जयपुर के दीक्षांत समारोह में कहा कि केवल पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकें ही नहीं विद्यार्थी जीवन व्यवहार और नित नए हो रहे परिवर्तनों से जुड़ी सामग्री का भी अध्ययन करे। इसी से उनकी… pic.twitter.com/DqvJj1N5ip
— Raj Bhavan Rajasthan (@RajBhavanJaipur) March 5, 2025
"बख्तियार खिलजी ने नालंदा विश्वविद्यालय को जलाया"
राज्यपाल ने कहा कि विदेशी लोगों ने भारत आने के बाद भारत के ज्ञान का दमन करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि यहां नालंदा और तक्षशिला जैसे महान विश्वविद्यालय थे और सारे विश्व से विद्यार्थी यहां पढ़ने आते थे. बख्तियार खिलजी ने नालंदा के पुस्तकालय को जलाने की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान को नष्ट करने के निरंतर प्रयास हुए पर वो सफल नहीं हुए.
राज्यपाले बागडे ने साथ ही छात्रों को सुझाव देते हुए कहा,"पढ़ाई के लिए कोई शॉर्टकट नहीं होता. केवल पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकें ही नहीं, विद्यार्थी जीवन व्यवहार और नित नए हो रहे परिवर्तनों से जुड़ी सामग्री का भी अध्ययन करें. इसी से उनकी बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और वे जीवन में सफल हो सकेंगे."
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