Rajasthan News: करौली जिले में एक बार फिर साइबर ठगों ने जिला प्रशासन को सीधी चुनौती देते हुए जिला कलेक्टर के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर फर्जी कॉल–मैसेज का जाल बिछा दिया है. हैरानी की बात यह है कि जब जिले के बड़े प्रशासनिक अधिकारी ही साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं, तो आम आदमी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. मामला तब सामने आया जब अंतरराष्ट्रीय नंबर +84906218294 से लोगों को कॉल और मैसेज किए जाने लगे. इन नंबरों की प्रोफाइल पर जिला कलेक्टर की फोटो लगाई गई थी, जिससे लोगों को भ्रमित कर भरोसा जीतने की कोशिश की गई. इस पर करौली जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना ने स्पष्ट किया कि यह नंबर और प्रोफाइल पूरी तरह फर्जी है और इसका उनसे कोई संबंध नहीं है.
यह पहला मामला नहीं है. पूर्व में भी सोशल मीडिया पर जिला कलेक्टर की फोटो का दुरुपयोग किया जा चुका है. सवाल यह है कि बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आने के बावजूद साइबर अपराधियों पर प्रभावी अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा? क्या साइबर सुरक्षा तंत्र सिर्फ कागजों तक सीमित है?
अपराधी भी नए-नए तरीके अपना रहे
राजस्थान सरकार द्वारा साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया गया है और जिला मुख्यालयों पर साइबर थाने भी खोले गए हैं. बावजूद इसके साइबर ठगी की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं. जानकारों का कहना है कि तकनीक के बढ़ते दायरे के साथ अपराधी भी नए-नए तरीके अपना रहे हैं, जबकि पुलिस की कार्यशैली अभी भी पारंपरिक ढर्रे पर ही दिखाई देती है.
साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें
जिला कलेक्टर ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अज्ञात या अंतरराष्ट्रीय नंबर से आने वाले कॉल, मैसेज या वीडियो कॉल का जवाब न दें. किसी भी स्थिति में बैंक विवरण, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें. संदिग्ध नंबरों को तुरंत ब्लॉक कर नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें.
हालांकि प्रशासन की यह अपील जागरूकता के हिसाब से बहुत ही जरूरी है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदारी किसकी है? यदि डीएम स्तर के अधिकारी की पहचान का दुरुपयोग हो सकता है, तो आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करे? साइबर अपराधियों का नेटवर्क कितना संगठित और सक्रिय है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वे प्रशासनिक अधिकारियों की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं.
प्रशासनिक तंत्र की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी दक्षता, त्वरित ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल मॉनिटरिंग को और मजबूत करने की आवश्यकता है. फिलहाल करौली में इस घटना ने प्रशासनिक तंत्र की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आमजन के मन में यह चिंता स्वाभाविक है कि जब जिला कलेक्टर तक सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी को साइबर ठगों से निजात कैसे मिलेगी?.
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