Rajasthan High Court: राजस्थान के झालावाड़ में बीते जुलाई 2025 में स्कूल हादसा हुआ था. इस घटना के बाद राजस्थान के जर्जर स्कूलों का मुद्दा राजस्थान हाई कोर्ट पहुंचा था. इस मामले में सोमवार (16 फरवरी) को फिर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट इस मामले में बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्वप्रेरित संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है. जस्टिस अशोक कुमार जैन और जस्टिस महेंद्र गोयल की खंडपीठ ने आज फिर मामले में सुनवाई की. मामले में एनसीपीसीआर की ओर से एडवोकेट वागीश सिंह ने पैरवी की. सुनवाई के दौरान स्कूल के लिए राज्य सरकार द्वारा बजट के प्रावधानों पर चर्चा हुई.
आज सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से एजी ने कोर्ट को आज बजट में स्कूलों को लेकर किए गए प्रावधान के बारे में बताया. महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि बजट में 550 करोड रुपए पुराने भवनों की मरम्मत के लिए और 450 करोड़ रुपए नए भवन बनाने के लिए व 200 करोड़ रुपए लैब बनाने के लिए प्रावधान किया गया है.
बजट ऊंट के मुंह में जीरा जैसा
एडवोकेट वागीश सिंह ने बताया कि कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई. कोर्ट ने कहा कि 20 हजार करोड़ का फंड चाहिए, लेकिन ये उसके सामने ना के बराबर है. हम 2 हजार करोड़ रुपए भी नहीं जुटा पा रहे हैं. ये ऊंट के मुंह में जीरा जैसा है.
वहीं, महाधिवक्ता की ओर से बताया गया कि भामाशाह और अन्य योजनाएं जिनसे सरकार को फंड मिल सकता है. वहां से सरकार को फंड इकट्ठा करने की जरूरत है. इस पर भी सरकार ध्यान दे रही है.
सरकार के प्लान से संतुष्ट नहीं
हालांकि कोर्ट आज पूरे मामले में सरकार के प्लान से संतुष्ट नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि पिछले 8 महीने से जब से यह मामला पेंडिंग है. कई बार कहने के बावजूद कोई ठोस रोडमैप नहीं मिला है. अब कोर्ट ने सभी पक्षकारों से इस मामले में सुझाव मांगे हैं. कोर्ट ने कहा कि जो भी फंड डोनेशन से या अन्य योजनाओं से आ रहा है. वो जिस काम के लिए आ रहा है, वो हो रहा है या नहीं. इस बात की मॉनिटरिंग कैसे की जाए. इस पर विचार किया जाए.
कोर्ट ने कहा कि हम एक कमेटी बनाने पर भी विचार करेंगे, जो ये सब मॉनिटर करेगी, कैसे फंड का इस्तेमाल हो रहा है. अगली सुनाई 5 मार्च को होगी.
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