
राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 115 सीटें जीतकर प्रदेश में 5 साल बाद सत्ता में वापसी की है. इसी के साथ प्रदेश में सत्ता बदलने का रिवाज बरकरार रहा और सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को 69 सीटों से संतोष करना पड़ा. इस विधानसभा चुनाव में 199 सीटों पर हुए चुनाव में 6 सीटें ऐसी थी, जहां जीत-हार का अंतर मात्रा हजार वोटों से कम रहा है.
हजार वोटों से कम अंतर वाली 6 सीटों में 4 भाजपा के खाते में आईं और 2 कांग्रेस के खाते में आईं है. कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे राजेन्द्र यादव जयपुर की कोटपूतली विधानसभा सीट से महज 321 वोट के अंतर से चुनाव हार गए है. उन्हें भाजपा के हंसराज पटेल ने चुनाव में मात दी है.
कठूमर सीट से भाजपा प्रत्याशी रमेश खींची ने कांग्रेस की संजना को 409 वोटों से हराया, तो वहीं जहाजपुर सीट से गोपीचंद मीणा ने कांग्रेस नेता और प्रियंका गांधी के करीबी धीरज गुर्जर को 580 वोटों से चुनाव हराया है. वहीं, धीरज गुर्जर ईवीएम के वोटों में जीते, लेकिन पोस्टल बैलट में पिछड़ने की वजह से उन्हें यह हार मिली. नोहर सीट से कांग्रेस के अमित चाचाण ने भाजपा के अभिषेक मटोरिया को 895 वोटों से चुनाव हराया है.
बायतु सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश चौधरी भी हजार वोटों के कम अंतर से जीत दर्ज कर पाने में सफल हुए हैं. हरीश चौधरी ईवीएम के वोटों में पिछड़े लेकिन पोस्टल बैलट की बढ़त ने उन्हें जीत दिला दी. हरीश चौधरी ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उमेदा राम बेनीवाल को 895 वोटों से हराया है.
जयपुर की चर्चित हवामहल सीट पर भी जीत का अंतर हजार वोटों से कम का रहा. यहां कांग्रेस ने मंत्री महेश जोशी का टिकट काटकर जिलाध्यक्ष आरआर तिवाड़ी को उम्मीदवार बनाया था, वहीं भाजपा ने संत और हिंदूवादी नेता बालमुकुंद आचार्य को उम्मीदवार बनाया गया. बालमुकुंद आचार्य ने आरआर तिवाड़ी को 974 वोटों से चुनाव हरा कर बीजेपी को सत्ता में वापसी करने में मदद की है.