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Rajasthan Politics: यूडीएच मंत्री खर्रा ने विधानसभा में गतिरोध की बताई असली वजह, बोले- कांग्रेस में बड़ा नेता बनने की मची है होड़

यूडीएचमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने NDTV से कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीन दौर की वार्ता हुई जिसमें गतिरोध दूर करने के बारे में समझौता हो गया था लेकिन गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से बात बिगड़ती चली गई.

Rajasthan Politics: यूडीएच मंत्री खर्रा ने विधानसभा में गतिरोध की बताई असली वजह, बोले- कांग्रेस में बड़ा नेता बनने की मची है होड़

Rajasthan News: राजस्थान के यूडीएच मंत्री (शहरी विकास मंत्री) झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि राजस्थान विधानसभा में जारी गतिरोध की असल वजह कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी खींचतान है. उन्होंने एनडीटीवी के साथ एक विशेष परिचर्चा में विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी खींचतान पर विस्तार से अपना पक्ष रखा और कहा कि गतिरोध दूर करने के बारे में समझौता हो चुका था लेकिन सिर्फ एक विधायक की वजह से बात बिगड़ती चली गई. मंत्री ने कहा कि सरकार अभी भी इस गतिरोध को खत्म करने के लिए तैयार है. राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पिछले छह दिन से कामकाज ठप्प है. यह हंगामा पिछले शुक्रवार (21 फरवरी) को मंत्री अविनाश गहलोत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए दादी शब्द का इस्तेमाल करने से शुरू हुआ था जिसे विपक्ष ने मुद्दा बना लिया है.

यूडीएचमंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि सोमवार (24 फरवरी) को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीन दौर की वार्ता हुई जिसमें गतिरोध दूर करने के बारे में समझौता हो गया था. उन्होंने बताया कि इसके तहत पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को अपनी बात रखना था. उसके बाद संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल को वक्तव्य देना था. इसके बाद कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को विशेष अनुमति देकर अपनी बात रखनी थी और उन्हें खेद प्रकट करना था.

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खर्रा ने आरोप लगाया कि डोटासरा ने खेद प्रकट नहीं किया जिसके बाद समझौते के बावजूद बात बिगड़ गई. मंत्री खर्रा ने कहा,"उन्होंने अपनी बात रखी मगर खेद प्रकट नहीं किया और उसके बाद बात बिगड़ी और सदन स्थगित हो गया. लेकिन उसके बाद सदन के अंदर उन्होंने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया उससे सदन की मर्यादा तार-तार हुई है."

"साथ बैठना और एक-दूसरे की टांग-खींचना अलग बात हैं. कांग्रेस नेता मौके-बेमौके एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते रहते हैं."

"डोटासरा ने खेद प्रकट नहीं किया"

मंत्री खर्रा ने इस परिचर्चा में आरोप लगाया कि कांग्रेस अंदरूनी राजनीति की वजह से समझौते को लागू नहीं करवा पाई. मंत्री ने कहा,"विधानसभा में जो घटनाक्रम चल रहा है ये प्रतिपक्ष के विधायक दल की अंदरूनी लड़ाई है कि उनमें कौन बड़ा नेता है. लोकतांत्रिक दृष्टि से सदन के अंदर नेता प्रतिपक्ष, और संगठन में प्रदेश अध्यक्ष बड़ा नेता होता है. इनको आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं करनी चाहिए."

झाबर सिंह खर्रा ने विरोध के दौरान सदन में कांग्रेस के नेताओं के एकजुट होकर सामने आने को दिखावा बताया. मंगलवार (24 फरवरी) को कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए अपने तमाम नेताओं को विधानसभा में इकट्ठा किया था. उस दिन सचिन पायलट और अशोक गहलोत भी विधानसभा आए थे.

लेकिन झाबर सिंह खर्रा ने कांग्रेस नेताओं के एक दिखने को खारिज करते हुए कहा,"साथ बैठना और एक-दूसरे की टांग-खींचना अलग बात हैं. कांग्रेस नेता मौके-बेमौके एक-दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते रहते हैं. शुक्रवार को जब नेता प्रतिपक्ष उस टिप्पणी के खिलाफ अपनी बात रख रहे थे, तो विधायकों को उछलकर आसन के सामने की क्या ज़रूरत थी?"

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