अजमेर के रहने वाले जगदीश कुमार अस्थानी को साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर लिया. जगदीश कुमार भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली में तकनीकी अधिकारी रहे. अब रिटायर्ड हो गए हैं. अब वे वैशाली नगर में पत्नी के साथ रहते हैं. उन्हें डरा धमकाकर 57 लाख रुपये की ठगी कर ली. आरोपियों ने पुलिस की वर्दी पहनकर वीडियो कॉल किया, और अपना नाम राजेंद्र बताया. उन्होंने कहा कि उनका आधार कार्ड मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है, और उनके खिलाफ मामला दर्ज है, जिससे बुजुर्ग दंपति डर गए और ठगों के जाल में फंसते चले गए.
FD तुड़वाई और बैंक से निकलवाए पैसे
ठगों ने डर का माहौल बनाकर पीड़ित से अलग-अलग खातों से रुपये ट्रांसफर करवाए. जानकारी के अनुसार, 20 अक्टूबर को पहली बार वीडियो कॉल किया. 20 दिसंबर की सुबह 9 से 10 बजे के बीच डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया. इसके बाद ठगों ने 3 एफडी तुड़वाकर रकम निकलवाई. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, अन्य बैंकों और पोस्ट ऑफिस से भी पैसे निकलवाए गए.
57 लाख रुपए खातों में डलवाए
22 दिसंबर को पहली बार 8 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर कराए गए. कुल मिलाकर जगदीश अस्थानी के खाते से 29 लाख और उनकी पत्नी अनीता अस्थानी के खाते से 28 लाख रुपये, यानी कुल 57 लाख रुपये ठगों के खातों में डलवा दिए गए.
13 दिन तक डिजिटल अरेस्ट
जगदीश अस्थानी ने बताया कि 13 दिनों तक शातिर बदमाशों ने उन्हें मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा, और एक ही कमरे में रहने का दबाव बनाया. इस दौरान लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए निगरानी की जाती रही. 31 दिसंबर को जब पीड़ित के खाते में करीब 1 लाख रुपये की पेंशन राशि आई तो ठगों ने उसे भी ट्रांसफर करने का दबाव बनाया.
फोन पर हुई गाली-गलौज
इस पर बुजुर्ग दंपति नाराज हो गए और ठगों से फोन पर कहासुनी और गाली-गलौज हुई, जिसके बाद 13 दिन बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट से छुटकारा मिला. इसके बाद पीड़ित ने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई. साइबर थाने के डिप्टी शमशेर के नेतृत्व में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है, और ठगों की तलाश की जा रही है. साइबर थाने के डीवाईएसपी शमशेर खान ने बताया कि प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है और ठगी गई राशि में से कुछ राशि को होल्ड भी कराया गया है.
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