Rajasthan News: राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित राजियावास गांव ने जानवरों के प्रति प्रेम की एक दिल छू लेने वाली कहानी रची है. यहां के लोगों ने एक कुत्ते को ऐसे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी मानो वह उनका अपना परिवार का सदस्य हो. यह कुत्ता गांव में हर मौत पर खुद-ब-खुद मृतक के घर पहुंच जाता था और पूरी अंतिम यात्रा में साथ रहता था.
श्मशान घाट तक वह चुपचाप बैठा रहता और जैसे अपनी श्रद्धांजलि देता. इसी वजह से गांववासी उसे सिर्फ एक जानवर नहीं बल्कि अपनों जैसा मानने लगे थे. उसकी यह सेवा भावना ने सबके दिलों में उसके लिए विशेष जगह बना ली थी.
कुत्ते की मौत पर गांव में फैला गहरा शोक
सोमवार की सुबह यह कुत्ता सड़क के किनारे मृत हालत में पड़ा मिला. मौत का कारण पता नहीं चल सका लेकिन खबर सुनते ही पूरे गांव में मातम छा गया. लोग उदास हो गए और सोशल मीडिया के जरिए यह सूचना आसपास के इलाकों तक तेजी से फैल गई. हर कोई इस घटना से स्तब्ध था.
सरपंच ब्रजपालसिंह रावत ने कहा कि यह कुत्ता हर शोक सभा में बिना बुलाए शामिल होता था और चुपचाप अपनी संवेदना जताता था. उसकी यह आदत ने ग्रामीणों के मन में उसके प्रति गहरा लगाव पैदा कर दिया था. खबर फैलते ही लोग अंतिम संस्कार की तैयारी में लग गए.
रामधुन और गाजे-बाजे के साथ अंतिम यात्रा
सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से कुत्ते की अंतिम यात्रा शुरू हुई. डीजे पर रामधुन बज रही थी और लोग गाजे-बाजे के साथ आगे बढ़ रहे थे. यात्रा राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची जहां पूरे रीति-रिवाज से उसका अंतिम संस्कार किया गया. इसके बाद शोकसभा आयोजित की गई और उठावना की रस्म भी निभाई गई.
इस मौके पर सरपंच ब्रजपालसिंह रावत समाजसेवी किशनसिंह मंगलसिंह महेन्द्रसिंह छितरसिंह वार्ड पंच कल्याणसिंह भरतसिंह नैनासिंह कालूराम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए. हर कोई भावुक था और कुत्ते की याद में आंसू बहा रहे थे.
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