Rajasthan News: राजस्थान की राजधानी जयपुर के मौजमाबाद (दूदू) इलाके में एक बड़ा राजस्व घोटाला सामने आया है. बागेत गांव के किसानों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि भू-माफियाओं को बेशकीमती जमीनों का फायदा पहुंचाने के लिए वर्षों पुराने 'गैर मुमकिन रास्ते' (खसरा नंबर 525) को रिकॉर्ड से ही खुर्द-बुर्द कर दिया गया है.
क्या है पूरा विवाद?
किसानों का आरोप है कि खसरा नंबर 525 में स्थित पुराना सरकारी रास्ता राजस्व कार्मिकों की मिलीभगत से रिकॉर्ड में हेरफेर कर हटा दिया गया. भू-माफियाओं को लाभ देने के लिए नया रास्ता गलत तरीके से कटवा दिया गया है. किसानों का कहना है कि पटवारी लादू सिंह और राजस्व विभाग के कुछ उच्च अधिकारियों ने प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर पुराने रास्ते की तरमीम बदल दी.
तहसीलदार ने दबाई रिपोर्ट?
इस पूरे प्रकरण में मौजमाबाद एसडीएम ने तहसीलदार सुरेंद्र विश्नोई को मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के लिए बार-बार तहरीर (आदेश) जारी की. चौंकाने वाली बात यह है कि हल्का पटवारी ने अपनी जांच रिपोर्ट बनाकर तहसीलदार को काफी समय पहले ही सौंप दी थी, लेकिन तहसीलदार ने इसे अभी तक कोर्ट (एसडीएम कार्यालय) में पेश नहीं किया. आखिर क्यों इस रिपोर्ट को दबाकर रखा गया है, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है.
कैमरे से बचते नजर आए तहसीलदार
जब NDTV के संवाददाता ने इस मामले को लेकर मौजमाबाद तहसीलदार सुरेंद्र विश्नोई से जवाब मांगा, तो उनकी प्रतिक्रिया हैरान करने वाली थी. वे कैमरे के सामने आने से कतराते रहे. उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा, 'यह कोई लॉजिकल बात नहीं है, मामला मेरी जानकारी में नहीं है.' अधिकारी के इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब ने किसानों के गुस्से को और भड़का दिया है. किसानों का सवाल है कि जब एसडीएम बार-बार आदेश दे रहे हैं, तो मामला तहसीलदार की जानकारी में कैसे नहीं है?
SDM ने कही ये बात
वही मौजमाबाद एसडीएम बलवीर सिंह ने कहा कि मामला कोर्ट में चल रहा है. टीम के साथ एक बार मौके पर जाकर देखूंगा. राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गैर मुमकिन रास्ते को खुर्दबुर्द नहीं किया जा सकता.
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