Rajasthan News: कभी घाटे के दलदल में डूबा रहने वाला राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) अब कामयाबी की नई इबारत लिख रहा है. जो निगम 5 साल पहले तक अपनी 'आर्थिक बदहाली' के लिए चर्चाओं में रहता था, वही RTDC अब मुनाफे की 'सुपरफास्ट' पटरी पर दौड़ रहा है. आंकड़ों की बाजीगरी ऐसी है कि करोड़ों का घाटा अब करोड़ों के फायदे में बदल चुका है और निगम अब अपने होटलों में भारी निवेश कर कायाकल्प की तैयारी में जुट गया है.
अर्श से फर्श और फिर 'शानदार वापसी'
वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो RTDC की कहानी किसी फिल्मी कमबैक से कम नहीं है. साल 2020-21 में जिस निगम को 12 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ था, उसने अगले 4 सालों में गजब की रिकवरी की. वर्ष 2021-22 में 12.80 करोड़, 2022-23 में 6.95 करोड़, 2023-24 में 11.05 करोड़ और 2024-25 में 7.32 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया गया. इस तरह पिछले 5 वर्षों के भीतर निगम ने कुल 26.69 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ (Net Profit) कमाकर सबको चौंका दिया है.
90 करोड़ का 'मास्टर प्लान', बजट की संजीवनी
निगम की इस संजीवनी को देखते हुए सरकार ने भी खजाना खोल दिया है. राज्य बजट 2026-27 में RTDC के लिए 90.38 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया है. इस भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल राजस्थान के पर्यटन ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने में होगा. इसमें जर्जर हो चुकी इमारतों का अधोसंरचना सुधार, होटलों का मॉडर्न अपग्रेडेशन, डिजिटल बुकिंग सिस्टम को हाईटेक बनाना और पर्यटक सुविधाओं का आधुनिकीकरण शामिल है. साथ ही, अब नए टूरिज्म सर्किट और लुभावनी पैकेज योजनाओं पर भी मिशन मोड में काम किया जा रहा है.
बंद पड़े 26 होटलों पर 'एक्शन' की तैयारी
RTDC के पास कुल 75 होटल और पर्यटन इकाइयां हैं, लेकिन चुनौती यह है कि इनमें से 26 फिलहाल बंद पड़ी हैं. अब इन बंद इकाइयों को फिर से जिंदा करने के लिए नई कार्ययोजना तैयार है. कई स्थानों पर भवन जर्जर स्थिति में हैं, जिनके नवीनीकरण के लिए चरणबद्ध निवेश का प्रस्ताव लाया गया है. इतना ही नहीं, कुछ कीमती संपत्तियों को सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP Model) पर संचालित करने के विकल्प भी गंभीरता से तलाशे जा रहे हैं.
कैसे बदली किस्मत? ये है कमाई का 'सीक्रेट' फॉर्मूला
सूत्रों की मानें तो निगम ने अपनी आय बढ़ाने के लिए लीक से हटकर काम किया है. अब RTDC के आलीशान परिसरों का उपयोग सिर्फ ठहरने के लिए ही नहीं, बल्कि विवाह समारोहों, कॉर्पोरेट कार्यक्रमों और बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के लिए भी धड़ल्ले से किया जा रहा है. इसके साथ ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बुकिंग व्यवस्था को इतना चुस्त-दुरुस्त बनाया गया है कि होटलों की ऑक्यूपेंसी दर में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है.
चुनौतियां और भविष्य की राह
विशेषज्ञों का साफ मानना है कि यदि बंद पड़े होटलों को प्रोफेशनल मैनेजमेंट के साथ चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया, तो निगम की तिजोरी और तेजी से भर सकती है. हालांकि, असली परीक्षा निजी होटलों के तगड़े कॉम्पिटिशन के बीच सर्विस की क्वालिटी और बेहतर सुविधाओं को बरकरार रखने की होगी. फिलहाल, घाटे के स्याह दौर को पीछे छोड़ चुका RTDC अब स्थायी वित्तीय मजबूती और पर्यटन विकास के एक संतुलित मॉडल की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है.
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