राजस्थान में एसआई भर्ती 2021 का मामला अभी भी खत्म होता नहीं नजर आ रहा है. हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 अप्रैल को भर्ती को रद्द रखने का फैसला दिया. वहीं, परीक्षा में चयनित 750 से अधिक प्रोबेशनर सब-इंस्पेक्टर्स ने सरकार को नार्को टेस्ट की चुनौती देते हुए एफिडेविट भेजा है. चयनित ट्रेनी एसआई के अभिभावकों ने सरकार को शपथ पत्र भेजकर अपनी योग्यता और ईमानदारी प्रमाणित करने की पेशकश की है. पत्र में लिखा गया है कि चयनित ट्रेनी एसआई अभ्यर्थियों का नार्को/पॉलीग्राफ टेस्ट करवा लिया जाए. इसे ही अंतिम साक्ष्य माना जाए.
आरोप- अधिकारी षड्यंत्र रच रहे
अगर टेस्ट में कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है तो उसे तुरंत बर्खास्त कर निजी संपत्ति से वेतन की वसूली की जाए. पत्र में लिखा कि सरकार छंटनी के पक्ष में है, लेकिन प्रशासन के कुछ अधिकारी गलत रिपोर्ट पेश कर निर्दोषों को फंसाने का षड्यंत्र रच रहे हैं. भर्ती रद्द नहीं होनी चाहिए. इससे मेहनत और ईमानदारी से चयनित युवाओं का भविष्य बर्बाद हो जाएगा. ऐसे अभ्यर्थियों के भविष्य की रक्षा की जानी चाहिए.
सवाल- सिर्फ एसआई भर्ती ही रद्द क्यों हुई?
पत्र में अभ्यर्थियों ने लिखा कि पिछली सरकार की लगभग 19 संदिग्ध भर्तियों में से 17 भर्तियों की जांच चल रही है. लेकिन उनमें से एक को भी रद्द नहीं किया गया है. फिर केवल सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 के मामले में ही प्रशासन द्वारा कोर्ट को पृथक्करण असंभव है कहकर गुमराह क्यों किया गया? यह भेदभावपूर्ण सामूहिक दंड 750 परिवारों को बर्बाद करने वाला निर्णय है.
असफल अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की
वहीं, दूसरी ओर राजस्थान हाईकोर्ट के भर्ती को रद्द करने के फैसले के बाद असफल अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता और असफल अभ्यर्थी कैलाश चन्द्र शर्मा व प्रमोद कुमार की ओर से कैविएट दायर की गई है.
याचिकाकर्ताओं ने केविएट में कहा है कि अगर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार या अन्य कोई चयनित अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करे तो उन्हें भी सुना जाए. बिना सुनवाई कोई अंतरिम या अंतिम आदेश नहीं दिए जाएं. हालांकि फिलहाल सरकार इस मामले में विचार कर रही है.
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