जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में आरोपी रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल को शुक्रवार (10 अप्रैल) को कोर्ट में पेश किया गया. करीब 960 करोड़ रुपए के घोटाले मामले में सुबोध अग्रवाल की गुरुवार को गिरफ्तारी हुई है. लंबे समय तक फरार चल रहे रिटायर्ड अफसर को एसीबी ने दिल्ली से गिरफ्तार किया. कोर्ट में पेशी के दौरान एनडीटीवी ने सुबोध अग्रवाल से सवाल पूछने की कोशिश भी की, लेकिन वो चुप्पी साधते दिखे. उन्होंने इतना जरूर कहा कि मामला विचाराधीन है और लंबित याचिका के बारे में उनके वकील ही जवाब देंगे.
लुक आउट नोटिस के भगोड़ा घोषित
सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हुआ था. इसके बाद भगोड़ा घोषित किया गया था. उनके वकील ने मेल करके सरेंडर करने की सूचना भी दी थी. हालांकि, एसीबी ने आधिकारिक रूप से इस बात पर कोई जवाब नहीं दिया है. एसीबी ने करीब 250 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की थी.
FIR रद्द मामले में भी नहीं मिली राहत
इससे पहले एफआईआर रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट में सुबोध अग्रवाल ने से पहले याचिका दायर की थी. उस मामले में अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो पाई है. पहले सुबोध अग्रवाल के वकील ने खुद को इस केस से अलग कर लिया था. इसके बाद हाईकोर्ट में जस्टिस अनिल उपमन की बेंच ने केस सुनने से इनकार कर दिया था.
जानिए क्या है मामला
दरअसल, रिटायर्ड अफसर पर आरोप है कि उन्होंने पीएचईडी में एसीएस रहते हुए जेजेएम योजना के तहत फर्म मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल और श्री श्याम ट्यूबवेल के खिलाफ मिली शिकायतों को दरकिनार किया. इन दोनों फर्मों के प्रोपराइटर महेश मित्तल और पदमचंद जैन पर आरोप है कि उन्होंने इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के फर्जी प्रमाण-पत्र लगाकर करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए थे. तमाम शिकायतों के बावजूद सुबोध अग्रवाल कार्यकाल के दौरान में दोनों फर्मों को टेंडर मिलता रहा. इसी वजह से जांच की सुई उनकी तरफ भी घूम गई.
विभाग के अन्य अधिकारी भी गिरफ्त में
इन शिकायतों के बाद तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल ने जांच के लिए एक्सईएन विशाल सक्सेना को भेजा. आरोप है कि विशाल ने अन्य आरोपी मुकेश पाठक के साथ मिलीभगत कर सर्टिफिकेट को सही ठहरा दिया. एसीबी ने 17 फरवरी को विशाल सक्सेना को बाड़मेर से और मुकेश पाठक को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से गिरफ्तार किया था. सूत्रों के मुताबिक, मुकेश पाठक ने खुद को इरकॉन इंटरनेशनल का सीईओ विजय शंकर बनकर सर्टिफिकेट अप्रूव्ड किए थे. इसके बाद इरकॉन के असली सीईओ ने ई-मेल के जरिए पीएचईडी को शिकायत भेजी थी, लेकिन उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.
यह भी पढ़ेंः SI भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों की चुनौती- हम नार्को टेस्ट के लिए तैयार, दोषी साबित हुए तो संपत्ति से वसूली हो