
'जहां रहेगा, वहीं रौशनी लुटाएगा, किसी चराग़ का अपना मकां नहीं होता..' वसीम बरेलवी की यह लाइन राजस्थान के चूरू जिले के सरदार शहर उपखण्ड अधिकारी विजेंद्र सिंह पर एकदम फिट बैठती है. उपखंड अधिकारी विजेंद्र सिंह चाहर पर्यावरण को बचाने के लिए काफी सजग और जागरूक हैं. इतना ही नहीं पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए उपखंड कार्यालय में खाली पड़ी जगह पर वाटिका लगा रहे हैं. विजेंद्र सिंह के इस प्रयास की आज हर कोई सराहना कर रहा है.
उपखंड परिसर अब नजर आएगा हरा-भरा
सरदार शहर के उपखंड परिसर अब जल्द ही हरा भरा नजर आएगा. परिसर में पहले जहां उबड़ खाबड़ बंजर जमीन थी. वहां अब सुंदर वाटिका बनाई जा रही हैं और यह सब सिर्फ उपखण्ड अधिकारी विजेंद्र सिंह के प्रयासों से हुआ है. उपखंड अधिकारी ने यहां लगभग 460 पौधे लगाए हैं जो फलदार, छायादार, औषधीय पौधे है. वहीं भामाशाह की मदद से लगाए गए पौधे पूरी तरह से स्वस्थ हैं जो 2-3 साल में पेड़ बन जाएंगे. जिसके बाद यहां पर चारो तरफ हरियाली ही हरियाली नज़र आयेगी.

एसडीएम विजेन्द्र सिंह पर्यावरण को बचाने का दें रहे संदेश
जहां भी होती है पोस्टिंग उस जगह को हरा भरा बनाने का करते है काम
एसडीएम विजेन्द्र सिंह जहां भी जाते हैं वहीं पर पर्यावरण को बचाने का संदेश देते हैं. इससे पहले भी एसडीएम की जहां भी पोस्टिंग हुई वहां पर पर्यावरण बचाने का संदेश दिया और बहुत सारे पौधे लगाए जो आज पेड़ बन गए हैं. यहां आने के बाद एसडीएम ने यहां की कायापलट कर दी है.
पेड़ लगाने से मन को मिलती शांति
उपखंड अधिकारी विजेंद्र सिंह ने कहा कि पेड़-पौधे लगाने में मेरी काफी रुचि रही है. मुझे पेड़ लगाने से शांति मिलती है. यहां पर जब मैं आया तो मैंने देखा बाहर से जो लोग आते थे, उन्हें धूप में ही बैठना पड़ता था. एसडीएम ऑफिस वीरान सी जगह लगती थी. बाहर से कोई भी व्यक्ति आता है तो उसके लिए छाया की व्यवस्था नहीं थी. उन्होंने कहा कि यहां पर पहले से कुछ पेड़ थे उनको सही करवाया. फिर सीजन आ गया तो मैंने पीछे की खाली पड़ी जगह पर पेड़ लगाने शुरू किये, क्योंकि ऐसा ही काम हमनें राजलदेसर तहसील मे सघन वन के रूप मे काम किया था. यहां भी हमनें एक भामाशाह की तलाश थी जो हमारा इस काम में सहयोग कर सके. फिर हमें हरिराम जी साहू मिले.उन्होंने अपने पिता जी की स्मृति में हमारा सहयोग किया.

उपखंड अधिकारी विजेंद्र सिंह अब तक 465 पौधे लगाएं
विजेंद्र सिंह ने आगे कहा कि हमारा पहले था की प्लांटेशन करेंगे, यह ध्यान नहीं था कि इस तरह से बढ़िया वाटिका बन जाएगी. शुरुआत छोटे से हुई बाद में 465 पौधे हमने यहां पर लगा दिए. हमने यहां पर दो तीन लोगों को लगा रखा हैं और सुबह शाम में खुद इन पौधों की देखभाल करता हूं. ड्रिप सिस्टम लगाया गया है. इसके अलावा यहां पर एक घूमने के लिए ट्रैक बनाया गया है ताकि यहां पर रहने वाले अधिकारियों की बुजुर्ग माता-पिता और महिला अधिकारी या परिवार की सदस्य घूम सकें. उन्होंने कहा कि हमारी यही प्रयास है कि किसी भी तरीके से उपखंड परिसर को हरा-भरा किया जा सके.
एसडीएम कार्यालय में कार्यरत निर्मल कुमार सोनी ने कहा कि पर्यावरण यदि हरा भरा होगा तो निश्चित रूप से ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा और आम जनता के लिए फायदेमंद रहेगी. एसडीएम साहब ने अपखंड परिसर को हरा भरा बनाने का बीड़ा उठाया है. यहां पर तरह-तरह के औषधीय पौधे लगाए गए हैं.
उपखंड कार्यालय में कार्यरत अभिषेक पारीक ने कहा कि सुबह जब यहां पर आते हैं तो इतनी हरियाली देख कर मन खुश हो जाता है. यहां पर आकर बहुत अच्छा लगता है.

वन संरक्षण एवं पर्यावरण समिति के अध्यक्ष मोनिका सैनी ने कहा कि राजस्थान के रेगिस्तान वाले इलाके में पौधारोपण करना या इसके विषय में कल्पना करना भी बहुत बड़ी चुनौती है. ऐसे में उपखंड अधिकारी विजेंद्र सिंह द्वारा किए जा रहे यह प्रयास काफी सराहनीय है. पेड़ के नीचे हरी घास पर समय बिताना तनाव को काफी कम कर सकता है. पेड़ों की शाखाओं पर बैठे पक्षियों की आवाज, तेज हवाओं से पत्तियों का हिलना और पेड़ों पर पत्तियों और फूलों की गंध. इन सबसे मन पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और तनाव को कम करने में मदद मिलती है.
वही गांधी दर्शन समिति के सह संयोजक भरत गौड़ ने कहा कि पेड़ लगाना सबसे बड़ा पुण्य का काम है. कोरोना काल में हमने देखा कि किस प्रकार से ऑक्सीजन के अभाव में कितनी जानें चली गई. ऐसे में उपखंड अधिकारी द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय है. उन्होंने भामाशाहों को प्रेरित कर उपखण्ड परिसर को हरा-भरा बनाने का अच्छा प्रयास किया है.
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