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टीकाराम जूली का बयान, '75 साल में पहली बार किसानों को रोकने के लिए इतनी बड़ी बैरिकेडिंग'

किसानों के आंदोलन पर राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने कहा है कि आज किसानों की छवि आतंकवादियों की तरह बनाने की कोशिश की जा रही है. 

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टीकाराम जूली का बयान, '75 साल में पहली बार किसानों को रोकने के लिए इतनी बड़ी बैरिकेडिंग'
राजस्थान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली.

Kisan Protest: देश की राजधानी दिल्ली पहुंचने के लिए किसान लगातार प्रयास कर रहे हैं. हालांकि, किसानों को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन द्वारा बड़ी और मजबूत बैरेकेडिंग कर रखी है. दिल्ली में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से किसान प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन भारी तादाद में पुलिस बल के साथ कड़ी बैरेकेडिंग की गई है. वहीं, किसान आंदोलन को लेकर राजस्थान के किसान भी अब प्रदेश सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं. वहीं, किसानों के आंदोलन पर राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tikaram Jully) ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है. उन्होंने कहा है कि आज किसानों की छवि आतंकवादियों की तरह बनाने की कोशिश की जा रही है. 

टीकाराम जूली ने कहा कि 75 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि किसानों के लिए बेरीकेटिंग लगाकर रास्ते बंद किए जा रहे हैं. सड़कों पर  कीले लगा दी गई. इस तरह का स्वागत में पहली बार देख रहा हूं जबकि देश की जीडीपी में किसानों का मुख्य रोल होता है.

आमदनी और स्वामी रंगनाथन आयोग रिपोर्ट लागू नहीं की गई

दौसा पहुंचे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने दौसा पहुंचने के बाद केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है. टीकाराम जूली ने कहा है कि आज देश की जीडीपी में अहम योगदान किसका है? और इस किसान की बात आज कोई सुनने को तैयार नहीं है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि 2022 में मैं किसान की आमदनी दोगुनी कर दूंगा, मोदी ने कहा था कि मैं स्वामी रंगनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करूंगा. लेकिन अब पद पर बैठने के बाद मोदी यह बात भूल चुके हैं कुर्सी पर बैठने के बाद बदल चुके हैं.

उन्होंने कहा, किसान इस देश और दुनिया का पेट भरता है उसे अन्नदाता के ऊपर आज ये अत्याचार किया जा  रहा है. लेकिन आज किसान ही समृद्ध नहीं है जबकि देश की जीडीपी किसानों मे किसान का सबसे बड़ा योगदान है.

उन किसानों पर आज मोदी सरकार गोलियां चल रही है, आंसू गैस के गोले रबर की गोलियों चला रही है. 1000 किसानों ने गोलियां खाकर देश में तीन काले कानून वापस करवाए थे. उस फैसले में जो बातें हुई थी आज उन बातों पर कोई चर्चा नहीं है आज किस जब अपनी बात रखते हैं तो उन्हें आतंकवादी करार दिया जाता है.

टीकाराम जूली ने आगे कहा कि ऐसी सरकार हमने कभी नहीं देखी आंदोलन पहले भी होते आए हैं. देश में गांव में शहर में सभी जगह आंदोलन होते हैं. लेकिन आंदोलन को किस प्रकार कुछ ले जाए किस प्रकार दबाया जाए उनके नेताओं को अरेस्ट कर लिया गया है. किसान नेताओं को जगह-जगह सर्च किया जा रहा है. इसलिए टीकाराम जुली ने मीडिया से भी अपील की है कि वह किसानों का साथ दे आने वाले समय में जनता इस सरकार को जवाब देगी.

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