Chaitra Navratri 2026 Date: होली के त्योहार का उत्साह खत्म होने के बाद अब उत्तर भारत के ज़्यादातर राज्यों में भक्तों ने चैत्र नवरात्रि ( Chaitra Navratri 2026) की तैयारी शुरू कर दी है. 19 फरवरी से शुरू हुआ फाल्गुन का महीना 21 मार्च को खत्म होगा. इसके बाद हिंदी महीनों के हिसाब से चैत्र का महीना शुरू हो जाएगा. इसी के साथ आस्था और भक्ति का संगम चैत्र नवरात्रि शुरू हो जाएगी. साल में चार बार नवरात्रि आती है- माघ, चैत्र, आषाढ़ और अश्विन. जो नवरात्रि फाल्गुन के बाद चैत्र में आती हैं, उन्हें चैत्र नवरात्रि कहते हैं.
नवरात्रों में घटस्थापना का होता है सबसे बड़ा महत्व
चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत को लेकर यदि आप उलझन में हैं, तो पंचांग के अनुसार स्थिति स्पष्ट है. इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026, गुरुवार से शुरू हो रही है. इसी दिन हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत 2083) (hindu New Year 2083) का भी आरंभ होगा. यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. इस दौरान मां दुर्गा की पूजा-उपासना बड़ी ही श्रद्धा के साथ की जाती है. नवरात्रों की पूजा में घटस्थापना ( Ghata sthapana ) का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है. इसे सही मुहूर्त पर स्थापित करने पर ही शुभ फल की प्राप्ति होती है.
घटस्थापना क्या होती है
घटस्थापना (जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है) (Ghata sthapana Muhurat) नवरात्रि के पहले दिन किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान है. आसान भाषा में, यह शक्ति की देवी मां दुर्गा का अपने घर में आह्वान और स्वागत करने की विधि है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को ब्रह्मांड का प्रतीक और उसमें सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता है. यहां घटस्थापना (कलश स्थापना) और पूजा के लिए सबसे सटीक समय दिया गया है:
चैत्र नवरात्रि 2026 में घटस्थापना के मुहूर्त की जानकारी
प्रतिपदा तिथि किसे कहते है
प्रतिपदा तिथि हिंदू पंचांग (कैलेंडर) के अनुसार किसी भी महीने के पक्ष की पहली तिथि को कहा जाता है. इसे आम बोलचाल की भाषा में 'पड़वा' या 'एकम' भी कहते हैं. हिंदू काल गणना में एक चंद्रमास (Month) दो पक्षों में बंटा होता है: शुक्ल पक्ष (बढ़ता हुआ चंद्रमा) और कृष्ण पक्ष (घटता हुआ चंद्रमा). इन दोनों पक्षों के पहले दिन को 'प्रतिपदा' कहा जाता है.
इस बार की नवरात्रि क्यों है खास?
हर साल की तरह इस बार माता की सवारी को लेकर भक्तों में जिज्ञासा बनी हुई है कि अबके बरस चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन किस सवारी पर होगा. इस बार मां अपने भक्तों से मिलने पालकी (डोली) पर सवार होकर आ रही है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरुवार को नवरात्रि शुरू होने पर माता पालकी में आती हैं, जो शुभता के साथ-साथ थोड़ा धैर्य और सावधानी बरतने का संकेत भी है. वही माता की विदाई हाथी पर होगी, जो भारी वर्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
कैसे तय होती नवरात्रों में माता की सवारी
पूजा के लिए जरूरी बातें
घटस्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त में ही करें. चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के समय स्थापना से बचना चाहिए. यदि आप सुबह जल्दी स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में कलश स्थापना करे जो सबसे उत्तम माना जाता है.