राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर हाईकोर्ट ने गहरी चिंता जताई है. जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने साइबर क्राइम के मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और गृह विभाग को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. कोर्ट ने कहा कि देश में साइबर अपराध एक गंभीर सामाजिक संकट बन चुका है. कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि ऐसे मामलों में आरोपी और पीड़ित दोनों ही बड़ी संख्या में 16 से 27 वर्ष की उम्र के युवा हैं.
अदालत ने कहा कि स्मार्टफोन, हाई-स्पीड इंटरनेट और सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग ने युवाओं को न केवल अपराध का शिकार बनाया है बल्कि कई बार अनजाने में अपराधी भी बना दिया है. इसका एक बड़ा कारण डिजिटल अज्ञानता और सोशल मॉनिटरिंग की कमी है.
चौंकाने वाले आंकड़े
राजस्थान पुलिस ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में साइबर अपराधों से जुड़े आंकड़े भी पेश किए. आंकड़ों के मुताबिक 1 जनवरी से 31 अक्टूबर 2025 तक प्रदेश में 1,14,520 साइबर शिकायतें दर्ज हुईं. इनमें 678 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई. पुलिस का दावा है कि उसमें से 143.36 करोड़ रुपये रिकवर या सुरक्षित किए जा सके. वर्ष 2024 में राज्य में 1,02,447 साइबर शिकायतें आई थीं, जिनमें करीब 795 करोड़ रुपये का फ्रॉड दर्ज हुआ था. वहीं, राजस्थान का डीग जिला साइबर अपराधों के लिए हॉट स्पॉट बनता जा रहा है.
अधिकारियों की पेशी
सुनवाई के दौरान गृह विभाग के एसीएस भास्कर सावंत और शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव विष्णु मोहन कोर्ट में उपस्थित हुए. विष्णु मोहन ने बताया कि स्कूलों में “नो-स्टडी शनिवार” के तहत साइबर सुरक्षा पर जागरूकता गतिविधियाँ कराई जा रही हैं. वहीं, भास्कर सावंत ने बताया कि पुलिस विभाग सेमिनार, जागरूकता अभियान और साइबर ड्राइव चला रहा है. हालांकि, अदालत ने दोनों विभागों के प्रयासों को पर्याप्त और संगठित न मानते हुए एक व्यापक मॉडल तैयार करने का आदेश दिया.
हाईकोर्ट ने दिए ये 6 अहम आदेश
हाईकोर्ट ने युवाओं को साइबर अपराधों से बचाने के लिए राज्य सरकार को समन्वित रणनीति अपनाने के छह महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं.
1. संयुक्त समिति का गठन: शिक्षा, गृह, DoITC और सामाजिक न्याय विभाग की संयुक्त समिति बनाई जाएगी, जो साइबर अपराधों के पैटर्न, कारणों और रोकथाम पर विस्तृत व्हाइट पेपर तैयार करेगी.
2. साइबर जागरूकता मॉड्यूल: सभी स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में समान साइबर जागरूकता कार्यक्रम लागू किया जाएगा, जिसमें सुरक्षित इंटरनेट, डिजिटल नैतिकता और कानूनी परिणामों की जानकारी दी जाएगी.
3. पुलिस साइबर सेल से समन्वय: शिक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि पुलिस यूनिट से मिले केस स्टडी और डेटा को प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों में शामिल किया जाए.
4. शिक्षकों और स्टाफ की ट्रेनिंग: स्कूल शिक्षकों, काउंसलरों और प्रशासकों को साइबर अपराधों की पहचान और रोकथाम के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.
5. 8 दिसंबर तक रिपोर्ट: विभागों की संयुक्त समिति को 8 दिसंबर तक अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी.
6. मुख्य सचिव की निगरानी: राज्य के मुख्य सचिव को सभी विभागों के कार्यों का समन्वय कर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं.
जांच पर नाराजगी
कोर्ट ने आरोपी जावेद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पुलिस जांच की धीमी गति पर असंतोष जताया और संबंधित जिले के एसपी को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया. अदालत ने पूछा कि जांच में देरी क्यों हो रही है और ‘म्यूल अकाउंट्स' की पहचान अब तक क्यों नहीं की गई.
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