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This Article is From Feb 09, 2024

Bharatpur: संतरे की खेती से हर साल लाखों की कमाई कर रहे किसान, इस तरह मिल रहा दोगुना फायदा

किसान जैविक खेती के जरिये लोगों की सेहत का भी ख्याल रख रहे हैं, जिससे न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है, बल्कि लोगों की सेहत पर भी कोई असर नहीं पड़ता है. यही वजह है कि बिना उर्वरकों के की जा रही संतरों की मांग बहुत अधिक है.

Bharatpur: संतरे की खेती से हर साल लाखों की कमाई कर रहे किसान, इस तरह मिल रहा दोगुना फायदा
जैविक खेती से संतरे में मिठास और रंग निखर जाता है
NDTV Reporter

Farmers are Cultivating Oranges: एक ओर किसान मुनाफे के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशकों का भरपूर उपयोग कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर कुछ किसान जैविक खेती से हर साल लाखों रुपए कमा रहे हैं. भरतपुर जिले के भुसावर कस्बे के अधिकांश किसान जैविक खेती करने में रुचि ले रहे हैं. वैसे भी यह कस्बा पहले से ही बागवानी के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध रहा है. कस्बे के गांव बोराज निवासी जगदीश मीना पिछले 6 साल से संतरे की जैविक खेती कर हर साल लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं.

हर साल हो रहा 5-6 लाख रुपये का मुनाफा 

किसान राहुल मीणा ने बताया कि उनके बड़े भाई जगदीश मीणा 6 साल पहले महाराष्ट्र के औरंगाबाद से संतरे के पौधे मंगाकर करीब 4 बीघा जमीन में संतरे की खेती शुरू की. इस खेती में रासायनिक खाद के बजाय जैविक खाद का प्रयोग किया गया. संतरे के पौधे लगाने के तीन साल बाद फल आना शुरू हो गए. जैविक खाद का ही कमाल है कि इस फल में मिठास और रंग लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. उन्हें संतरे बेचने के लिए मंडी भी नहीं जाना पड़ता बल्कि व्यापारी सीधे ही खेत से फल को खरीदकर ले जाते है. उन्हें इस संतरे की खेती से मेहनत मजदूरी काटकर करीब 5 से 6 लाख रुपए का मुनाफा हो जाता है जो कि परंपरागत खेती से दोगुने से भी अधिक है.

जैविक खाद का ही कर रहे इस्तेमाल 

उन्होंने कहा कि किसान अधिक लाभ लेने के लिए रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग करते हैं. इसके अधिक मात्रा में उपयोग से न सिर्फ फसल प्रभावित होती है बल्कि इससे जमीन की सेहत, इससे पैदा होने वाली फसल को खाने वाले इंसानों की सेहत के साथ ही पर्यावरण पर भी बेहद प्रतिकूल असर पड़ता है. बागवानी के साथ-साथ अनाज और सब्जियों के माध्यम से इस जहर के लोगों के शरीर में पहुंचने के कारण वे तरह-तरह की बीमारियों का शिकार बन रहे हैं.

बागवानी में कम मेहनत है और मुनाफा ज़्यादा 

मीणा कहते हैं, हम जैविक खेती के ज़रिये लोगों की सेहत का भी ख्याल रख रहे हैं. जिससे न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है बल्कि लोगों की सेहत पर भी कोई असर नहीं पड़ता है. यही वजह है कि हमारे द्वारा किए जा रहे संतरे की खेती स्थानीय और बाहर के व्यापारियों को पसंद आ रही है कि हमारे द्वारा जैविक खाद का प्रयोग किया जा रहा है.किसान राहुल द्वारा अन्य किसानों से अपील करते हुए कहा कि वह भी पारंपरिक खेती की बजाय बागवानी कर कम लागत में अधिक मुनाफा ले सकते हैं यह ऐसी खेती है जो किसान की आर्थिक स्थिति को मजबूत करती है.

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