
दौसा जिले के बांदीकुई गुढाकटला रामबास के मनीराम मीणा हत्याकांड का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. गुस्साए ग्रामीणों ने रविवार को मुकरपुरा चौराहे पर पूर्व पंचायत समिति सदस्य दौलतराम मीणा के नेतृत्व में जाम लगा दिया. करीब एक घंटे तक जाम लगने के कारण वाहनों का लंबी कतारें दोनों तरफ लग गईं.
ग्रामीण मनीराम मीणा हत्याकांड के मामले में पिछले 19 दिनों से हत्यारों को पकड़ने की मांग कर रहे हैं लेकिन पुलिस इस मामले की जांच में असफल रही है. इसको लेकर ग्रामीणों ने तीन दिन पहले ही बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया था और रविवार को सैकड़ों की तादाद में ग्रामीण दौलत राम मीणा के नेतृत्व में गुढा कटला से मुकरपुरा चौराहे पर पहुंच गए.
हालांकि इस दौरान प्रशासन पूरी तरह चाक चौबंद दिखाई दिया. एडीएम सुरेश यादव, एडिशनल एसपी लालचंद कायल और बसवा एसडीएम नवनीत कुमार बांदीकुई एसडीएम नीरज मीणा सहित बांदीकुई बसवा और कोलवा थाना पुलिस के जवान मौजूद रहे. इस दौरान आरएसी और क्यूआरटी भी भारी संख्या तैनात रही. विधायक गजराज खटाना, पूर्व युवा बोर्ड के चेयरमैन भूपेंद्र सैनी और भामाशाह केदार प्रसाद मीणा भी पहुंचे. पुलिस प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने आंदोलनकारियों को काफी समझाइश की. बाद में मनीराम मीणा के परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने और 10 लाख की आर्थिक मदद देने पर सहमति बनी.
आर्थिक मदद विधायक खटाणा और भामाशाह केदार मीणा के जरिए होगी. साथ में इस पूरे मामले में जांच अधिकारी को बदलने सहित 20 दिनों के भीतर निष्पक्ष जांच का खुलासा करने की मांग को भी प्रशासन ने स्वीकार किया. इसके लिए एक एसआईटी का गठन किया गया. जो मामले की जांच करेगी.
गत 1 जुलाई को मनीराम मीणा गंभीर रूप से घायल अवस्था में बांदीकुई जंक्शन के करीब रेलवे ट्रैक पर जीआरपी को पड़े हुए मिले थे. जीआरपी ने इसकी सूचना परिजनों को दी और परिजनों ने इलाज के लिए उन्हें एसएमएस में भर्ती कराया था. वहां 4 जुलाई को मनीराम की मौत हो गई थी. परिवार जन का तब से ही आरोप था कि मनीराम मीणा अपने कुछ मिलने वालों के साथ जाने का कहकर गए थे लेकिन उनका घायल अवस्था में पड़ा मिलना हत्या का संदेह जताता है.
भामाशाह केदार मीणा ने एक बार फिर अपनी दरियादिली का सबूत पेश किया है. उन्होंने मनीराम मीणा के परिवार को विधायक गजराज खटाना के साथ मिलकर 10 लाख रुपये की राशि देने और अपनी सहमति जताकर यह दर्शा दिया कि उनके द्वार गरीब और मजदूरों के लिए सदैव खुले हैं. केदार मीणा पूरे जिले में भामाशाह के तौर पर जाने जाते हैं और उनकी दरियादिली आसपास के क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है. मनीराम काफी गरीबी और पिछड़े परिवार से ताल्लुक रखते थे और परिवार में एक मात्र यही सहारा बताए जा रहे थे.