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This Article is From Dec 11, 2023

Article 370: क्या जम्मू कश्मीर को वापस मिलेगा स्पेशल राज्य का दर्जा? कुछ ही देर में आएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला

16 दिन तक चली लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसे आज सुनाया जाएगा. मामले में शीर्ष अदालत अनुच्छेद-370 को निरस्तकरना संवैधानिक है कि नहीं इस पहलू पर अपना फैसला देगी.

Article 370: क्या जम्मू कश्मीर को वापस मिलेगा स्पेशल राज्य का दर्जा? कुछ ही देर में आएगा सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

Supreme Court Verdict On Article 370: उच्चतम न्यायालय पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को निरस्त करने संबंधी केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज अपनमा फैसला सुनाएगा. मामले में मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ फैसला सुनाएगी, जिसमें न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत शामिल हैं.

शीर्ष अदालत ने 16 दिनों की लंबी सुनवाई के बाद पांच सितंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का बचाव करने वालों और केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वरिष्ठ अधिवक्ताओं हरीश साल्वे, राकेश द्विवेदी, वी गिरि और अन्य की दलीलों को सुना था.

याचिकाकर्ताओं के 18 वकीलों ने दिन दलीलें 

याचिकाकर्ताओं की ओर से 18 वकीलों ने याचिकाकर्ताओं की पैरवी की है. जिनमें कपिल सिब्बल, गोपाल सुब्रमण्यम, दुष्यंत दवे राजीव धवन, दिनेश द्विवेदी, गोपाल शंकरनारायण शामिल हैं . जबकि केंद्र और दूसरे पक्ष की ओर से AG आर वेंकटरमणी, SG तुषार मेहता, हरीश साल्वे, महेश जेठमलानी, मनिंदर सिंह, राकेश द्विवेदी ने दलीलें रखीं.

संविधान के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से लड़ाई जारी रखेगी- उमर अब्दुल्ला 

शीर्ष अदालत के फैसले से पहले मामले पर नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. अब्दुल्ला ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय के प्रतिकूल फैसले की स्थिति में भी उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर में शांति भंग नहीं करेगी.

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की बहाली के लिए संविधान के अनुरूप शांतिपूर्ण तरीके से लड़ाई जारी रखेगी.उमर ने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय को फैसला देना है. फैसला देने दीजिए. अगर हमें स्थिति बिगाड़नी होती तो हमने 2019 के बाद ही ऐसा किया होता.

हालांकि, हमने तब भी कहा था और अब भी दोहराते हैं कि हमारी लड़ाई शांतिपूर्ण तरीके से संविधान के अनुरूप होगी. हम अपने अधिकारों की रक्षा और अपनी पहचान को सुरक्षित रखने के लिए संविधान और कानून की मदद ले रहे हैं.''

(इनपुट- भाषा से भी) 

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