
Uttarakhand Tunnel Accident: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग में 17 दिनों से फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने का काम अंतिम चरण में हैं. सिल्क्यारा-डंडालगांव टनल (Uttarkashi Tunnel Collapse Rescue) में फंसे इन मजदूरों को बचाने के लिए 13 नवंबर से रेस्क्यू ऑपरेशन चल रहा था. इस रेस्क्यू ऑपरेशन में दुनिया की कई हाइटेक मशीनों को लगाया गया था. लेकिन ये फेल हो गई. जैसे-जैसे एक-एक कर फौलादी मशीने फेल हो रही थी, वैसे-वैसे मजदूरों तक पहुंचने की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही थी. लेकिन अंत में रैट माइनर्स (rat miners) ने मोर्चा संभाला और फिर इनकी टीम ने तो कमाल ही कर दिया. रैट माइनर्स ने 58 मीटर की मैनुअल ड्रिलिंग कर ली है.
सिल्कयारा सुरंग बचाव अभियान पर अतिरिक्त सचिव तकनीकी, सड़क और परिवहन महमूद अहमद मंगलवार दोपहर बाद जैसे ही यह बताया कि 55.3 मीटर की ड्रिलिंग हो गई है...लगभग 4-5 मीटर और बचा है...शाम तक हमें कुछ अच्छी खबर मिल सकती है. लोगों के चेहरे खिल गए. इस रेस्क्यू ऑपरेशन में रैट माइनर्स असली हीरो बनकर सामने आए. आइए जानते हैं कौन होते हैं रैट माइनर्स और इनका काम क्या होता है.
#WATCH | उत्तरकाशी सुरंग बचाव अभियान | सुरंग के प्रवेश द्वार पर NDRF कर्मी मौजूद हैं।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 28, 2023
55.3 मीटर की ड्रिलिंग हो गई है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 4-5 मीटर ड्रिलिंग और बची है। pic.twitter.com/GJ1BrPnlWV
जानिए क्या होता है रैट होल माइनिंग
रैट होल माइनिंग में चूहे की तरह खुदाई की जाती है. रैट मतलब चूहा, होल मतलब छेद और माइनिंग मतलब खुदाई. इस प्रकिया में एक छेद में घुसकर चूहे की तरह खुदाई की जाती है. इस प्रकिया में पतले से छेद से पहाड़ के किनारे खुदाई शुरू होती है और फिर पोल बनाकर धीरे-धीरे छोटी हैंड ड्रिलिंग मशीन से ड्रिल किया जाता है.
ड्रिल के बाद हाथ से ही मलबे को बाहर निकाला जाता है. जिस तरह कोई चूहा किसी छेद में घुसकर मिट्टी की खुदाई करता है और फिर मिट्टी को बाहर लाकर रखता है वैसे ही रैट होल माइनिंग की जाती है.
#WATCH उत्तराखंड: उत्तरकाशी सुरंग हादसे में बचाव अभियान अभी भी जारी है जहां 41 श्रमिक फंसे हुए हैं। ड्रोन वीडियो घटनास्थल से है।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) November 28, 2023
उत्तराखंड CM ने ट्वीट किया, "...सुरंग के अंदर पाइप डालने का काम पूरा हो गया है। जल्द ही सभी मजदूरों को बाहर निकाल लिया जाएगा।" pic.twitter.com/fs8bOgF1HJ
कोयले की खुदाई में होता था इसका इस्तेमाल
रैट होल माइनिंग का इस्तेमाल भारत में कोयले की खुदाई में होता रहा है. झारखंड, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में रैट होल माइनिंग होती थी, लेकिन इनिंग की यह प्रकिया काफी खतरनाक है, इसमें कई बार हादसे भी हो चुके हैं. इसलिए इसे कई बार बैन भी किया जा चुका है. लेकिन उत्तरकाशी सुरंग हादसे में इस पुरानी तकनीक ने मजदूरों तक पहुंचने का रास्ता बनाया.
रैट माइनर्स ने खुद बताया कैसे करते हैं काम
उत्तराखंड सुरंग हादसा में मजदूरों तक पहुंचने के लिए दिल्ली और झांसी से रैट माइनर्स बुलाए गए थे. रविवार को साइट पर छह 'रैट होल' माइनर्स पहुंचे. इन रैट माइनर्स को प्राइवेट कंपनी ट्रेंचलेस इंजिनियरिंग सर्विसेज की ओर से बुलाया गया था.
ये दिल्ली समेत कई राज्यों में वाटर पाइपलाइन बिछाने के समय अपनी टनलिंग क्षमता का प्रदर्शन कर चुके हैं. यहां पर 6 लोगों की यह टीम ड्रिल मशीनों के साथ पहुंची. 800 मिलीमीटर के पाइप में घुसकर इन लोगों ने खुदाई शुरू की. और अब मजदूरों तक पहुंचने वाले हैं.
झांसी के रहने वाले रैट होल माइनर्स परसादी लोदी ने बताया कि मुझे टनल में जाने से डर नहीं लगता. यहां तो 800 मिमी का पाइप है, हम लोग तो 600 मिमी के पाइप में घुसकर भी रैट माइनिंग कर लेते हैं. परसादी के साथ झांसी से आए राकेश ने कहा कि हमारी कोशिश है कि सुरंग में फंसे मजदूर हमारे जरिए बाहर आ जाएं. आखिर वो भी हमारी तरह ही मजदूर हैं. इस काम को करने में हम बिल्कुल देरी नहीं लगाना चाहते. अगर सब कुछ ठीक रहा, तो शुरुआत करने से लेकर 18 घंटे लगेंगे.
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