
कोटा राजस्थान के उन शहरों में से है, जहां औद्योगीकरण बड़े पैमाने पर हुआ है। चंबल नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित कोटा अपने महलों, संग्रहालयों, मंदिरों और बाग-बगीचों के लिए भी जाना जाता है. कोटा जिले की ‘ब्लैक पॉटरी‘ प्रसिद्ध है. इसके अलावा कोटा में कोड़े मार होली भी मशहूर है, जिसे देखने बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी यहां आते हैं. देशभर में विभीषण का इकलौता मंदिर भी कोटा में ही है.
कोटा में नवीनता और प्राचीनता का अनूठा संगम देखने को मिलता है. जहां एक तरफ शहर के ऐतिहासिक स्मारक प्राचीनता की झलक दिखाते हैं, वहीं चंबल नदी पर बना हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लान्ट और मल्टी मेटल उद्योग आधुनिकता का अहसास कराते हैं. कोटा में ही देश की निजी क्षेत्र की प्रथम कृषि मण्डी “श्री हनुमान कृषि उपज परिसर” के नाम से स्थापित की गई थी.
कोटा को राजस्थान का पावर हब भी माना जाता है क्येंकि इसके आसपास राजस्थान परमाणु ऊर्जा केंद्र, कोटा थर्मल पावर, अंता गैस पावर प्लांट और जवाहर सागर पावर प्लांट जैसे चार शक्तिशाली बिजली संयंत्र हैं.
शिक्षा नगरी के रूप में उभर रही नई पहचान
बीते कुछ वर्षों में कोटा को देश की शिक्षा नगरी के रूप में भी पहचाना जाने लगा है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए देशभर से युवा पहुंचते हैं, इसी के चलते हाल ही में यह शहर वर्ल्ड ट्रेड फोरम की सूची में दुनिया का सातवां सबसे ज्यादा भीडभाड़ वाला शहर बना है. यह जयपुर और जोधपुर के बाद राजस्थान का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है.
राजा कोटिया भील से जुड़ा है इतिहास
कोटा का इतिहास राजा कोटिया भील के काल से मिलना शुरू होता है, जिसने कोटा में नीलकंठ महादेव मंदिर स्थापित किया. कोटा को पहले पहले कोटाह के नाम से जाना जाता था, एक समय में यह बूंदी राज्य का एक हिस्सा था. मुगल शासक जहांगीर द्वारा बूंदी के शासकों को पराजित किए जाने के बाद कोटा 1624 में एक स्वतंत्र राज्य बन गया, इसका शासक जहांगीर ने बूंदी के राव रतन के दूसरे बेटे राव माधो सिंह को बनाया. कोटा 1818 ई. में ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन हो गया. 25 मार्च 1948 को कोटा रियासत का भारत के राजस्थान राज्य में विलय किया गया.
प्रमुख दर्शनीय स्थल
कोटा अपने मंदिरों, महलों और बागों के लिए भी मशहूर है. यहां के सबसे प्रमुख देवालयों की बात करें तो इनमें मथुराधीश मंदिर, कंसुआ का शिव मंदिर, चारचोमा का शिवालय, कैथून का विभीषण मंदिर, भीम चौरी, बूढ़ादीत का सूर्य मंदिर, खुटुम्बरा शिवमंदिर, मुनि सुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, रंगबाड़ी (भगवान महावीर का प्राचीन मंदिर), गेपरनाथ शिवालय, डाढ देवी माता मंदिर, करणेश्वर महादेव मंदिर, गोदावरी धाम और कन्वास का मंदिर समूह प्रमुख हैं. प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में कोटा का हवामहल, अभेड़ा महल, अबली मीणी का महल, अकेलगढ़ किले के अवशेष, केसर खान व डोकर खान की कब्रे, नेहर खां की मीनार, महाराव माधोसिंह म्यूजियम, दर्रा का किला, भीतरिया कुण्ड, पद्मापीर की छतरी, अधरशिल्प, कोटागढ़ पैलेस आदि शामिल हैं. इसके अलावा यहां की तिपटिया व आलनिया की 50000 वर्ष पुरानी रॉक पेन्टिंग्स पुरातत्व के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं. कोटा के प्रमुख बाग-बगीचों में किशोर विलास बाग, छत्र विलास उद्यान, क्षार बाग, चंबल उद्यान, समाधि उद्यान, अहिंसा वाटिका और लक्खीबुर्ज उद्यान आदि शामिल हैं.
कोटा एक नजर में
- भौगोलिक स्थिति - 23 डिग्री 56 से 25 डिग्री 51 मिनट उत्तरी अक्षांश तक व 75 डिग्री 37 मिनट से 76 डिग्री 38 मिनट पूर्वी देशांतर तक
- क्षेत्रफल - 5217 वर्ग कि.मी.
- जनसंख्या - 1,951,014
- जनसंख्या घनत्व - 374 (प्रति वर्ग कि.मी.)
- लिंग अनुपात - 911
- साक्षरता दर - 77.48 प्रतिशत
- पंचायत समितियां - 5
- संभाग - कोटा
- तहसीलें - 6 (लाडपुरा (कोटा), दीगोद, पीपल्दा, रामगंजमण्डी, सांगोद, कनवास)
- विधानसभा क्षेत्र - 6 (कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण, पीपल्दा, सांगोद, लाडपुरा, रामगजमंडी)