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राजस्थान के इस जिले में पेन-कॉपी चढ़ाने से प्रसन्न होती हैं शारदा मां, उमड़ती है छात्रों की भीड़

राजस्थान में मां शारदा का एक ऐसा मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी इच्छा पूरी होने के बाद भोग के रुप में मां को मिठाई नहीं  बल्कि कॉपी पेन चढ़ाते हैं. आईए जानते है इसके पीछे का कारण.

राजस्थान के इस जिले में पेन-कॉपी चढ़ाने से प्रसन्न होती हैं शारदा मां, उमड़ती है छात्रों की भीड़
Rajasthan sirohi saraswati mandir
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Maa Saraswati Temple Sirohi:  हर साल माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है. इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है. ऐसा माना जाता है कि अगर छात्र शिक्षा या किसी कला से जुड़े कामों की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा से करते हैं, तो उनका हर काम शुभ होता है. देशभर में सरस्वती मां के कई मंदिर देखने को मिल जाएंगे, हर मंदिर की अपनी एक महिमा है, लेकिन राजस्थान में मां शारदा का एक ऐसा मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी इच्छा पूरी होने के बाद भोग के रुप में मां को मिठाई नहीं  बल्कि कॉपी पेन चढ़ाते हैं. इसलिए बसंत पंचमी के दिन राजस्थान के सिरोही के अजारी गांव में बने मार्कंडेधाम में सरस्वती मंदिर में भक्तों का तांता मां के दर्शन के लिए लगा रहता है.

मिठाई नहीं मां को चढ़ाते है कॉपी किताब और पेंसिल

इस गांव में बना मार्कंडेश्वर धाम का सरस्वती मंदिर में लोग अपने बच्चों की वाणी, शिक्षा और बुद्धि के लिए मन्नतें मांगने आते हैं. माना जाता है कि यहां मांगी गई हर मन्नत पूरी भी होती है. एक मान्यता के अनुसार मन्नत पूरी होने पर यहां कॉपी किताब और पेंसिल का प्रसाद चढ़ाया जाता है.

मार्कंडेश्वर धाम का सरस्वती मंदिर

मार्कंडेश्वर धाम का सरस्वती मंदिर
Photo Credit: Social Media X

मार्कंडेय महादेव और सरस्वती मंदिर

पिंडवाड़ा के आजारी क्षेत्र में स्थित इस मंदिर का इतिहास गुप्त काल से जुड़ा माना जाता है. लोक मान्यताओं के अनुसार, यहां की भूमि महर्षि मार्कंडेय की तपस्थली रही है, जिससे इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है. यह पावन धाम सिरोही शहर से लगभग 28 किमी और आजारी गांव से महज 2 किमी की दूरी पर स्थित है. यदि आप पिंडवाड़ा से आबूरोड की ओर जाते हैं, तो मुख्य शहर से 5 किमी दक्षिण में यह मंदिर स्थित है.

मंदिर की संरचना 

यह मंदिर महादेव और विद्या की देवी मां सरस्वती को समर्पित है. मंदिर परिसर एक ऊंची सुरक्षा दीवार से घिरा हुआ है. इसके भीतर एक प्राचीन कुंड है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी स्थान पर बैठकर महर्षि मार्कंडेश्वर ने मां सरस्वती को विद्या का दान देने के लिए कठोर तपस्या की थी. परिसर में भगवान विष्णु और देवी सरस्वती की अत्यंत सुंदर और छोटी प्रतिमाएं विराजमान हैं. मंदिर के समीप ही 'गया कुंड' नामक एक पवित्र तालाब है. यहां लोग अपने पूर्वजों की शांति के लिए अस्थि विसर्जन करने आते हैं.

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