
Rajasthan News: जोधपुर जिले के लूणी विधानसभा क्षेत्र के छोटे से कस्बे लूणी में रहने वाले अशोक कुमार भाटी ने अपनी जिंदगी का लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ पढ़ाई की डिग्री हासिल करना रखा है. यही कारण है 68 साल की उम्र होने के बाद भी वह लगातार किसी न किसी विषय में परीक्षा देकर डिग्री हासिल कर रहे हैं. उनका सपना है कि जिस तरह से लूणी के रसगुल्ले प्रसिद्ध हैं, वैसे ही उनकी डिग्रियों के बारे में भी सबको पता चले.
लूणी से नौकरी छोड़कर किया व्यापार
भाटी का पढ़ाई को लेकर जो जुनून है वह वाकई काबिले तारीफ है. उन्होंने सन 1971 में दसवीं की परीक्षा पास की और सन 1975 में बीकॉम और 1977 में एमकॉम की डिग्री हासिल करने के बाद में डिग्रियों के सफर पर चल पड़े. हालांकि सन 1975 में उन्हें बैंक में एलडीसी की नौकरी भी मिली. तब उनकी सैलरी 715 रुपए थी. उन्होंने 10 दिन नौकरी करने के बाद नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़ने का कारण उन्हें लूणी से जोधपुर आने-जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी. इसलिए उनके पिता ने अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए कहा और फिर वह लूणी रेलवे स्टेशन पर वेंडर का काम करने लगे.

परिवार से मिलता है पूरा सहयोग
सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें कई जगहो पर नौकरी के ऑफर मिले थे, लेकिन अपने गांव से दूर होने की वजह से उन्होंने नौकरी करना उचित नहीं समझा. यही कारण है कि अपने गांव से जुड़े लगाव के कारण वह आज भी रेलवे स्टेशन पर वेंडर का काम करते हुए अपने परिवार का भरण पोषण भी कर रहे हैं. और पढ़ाई भी कर रहे हैं वही उनकी पढ़ाई में उनके परिवार का भी पूरा सहयोग उन्हें मिलता है.
गिनीज बुक में दर्ज कराना चाहते हैं नाम
वेंडर के कार्य करने के साथ-साथ उन्होंने पढ़ाई का साथ नहीं छोड़ा और अब तक 28 डिग्री हासिल कर चुके हैं. हाल ही में उन्होंने एक परीक्षा और दी है, जिसका रिजल्ट आने वाला है. उसके बाद अशोक कुमार भाटी को उम्मीद है, कि उनका नाम गिनीज बुक में दर्ज हो जाएगा. इससे पहले भी अशोक कुमार भाटी का नाम लिम्का बुक में 2009 और इंडियन बुक में 2013 में रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है.
'नही छोड़ेंगे शिक्षा'
अशोक कुमार भाटी को पूर्व राज्यपाल अंशुमान सिंह द्वारा भी सम्मानित किया गया है. वहीं दो बार जिला स्तर पर जिला कलेक्टर एक बार उपखंड स्तर पर एसडीएम ने उनकी डिग्रियों को लेकर सम्मानित किया. वही राजीव गांधी एकता सम्मान से उन्हें सम्मानित करने का पत्र मिला था, लेकिन उसमें शर्त रखी गई थी कि उन्हें कुछ पैसे जमा करवाने पड़ेंगे. इसलिए उन्होंने वह पुरस्कार नहीं लिया. अपने जीवन का आधे से अधिक सफर गुजार चुके अशोक कुमार भाटी का आगे भी डिग्री प्राप्त करने का संकल्प है. उन्होंने कहा कि जब तक शरीर साथ देगा तब तक वह शिक्षा का साथ नहीं छोड़ेंगे.
भाटी की हासिल की हुई डिग्रियां
डिप्लोमा इन टैक्सेशन एंड लॉज प्रैक्टिस, डिप्लोमा इन टूरिस्ट और होटल मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन वॉटर सेंड मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन सोशल प्रॉब्लम ऑफ राजस्थान, डिप्लोमा इन न्यूट्रिशन एंड हेल्थ एजुकेशन, डिप्लोमा इन मैनेजमेंट, डिप्लोमा इन कल्चर एंड टूरिज्म, डिप्लोमा इन अभ्रंश लैंग्वेज, डिप्लोमा इन प्रकृत लैंग्वेज, डिप्लोमा इन लाइब्रेरी एंड इनफॉरमेशन साइंस, डिप्लोमा इन योग सहित कई डिग्रियां हासिल की है. वही बीजीएमसी में उन्होंने गोल्ड मेडल भी हासिल किया है.
रेलवे से असंतुष्ट दिखे भाटी
अशोक कुमार भाटी को एक बात का अफसोस है कि वह रेलवे स्टेशन पर अन्य वेंडर्स को भी पढ़ाई के लिए मोटिवेट करके उन्हें ग्रेजुएशन तक करवाया. इसके बावजूद रेलवे प्रशासन ने उन्हें आज तक सम्मानित नहीं किया. उन्होंने कहा कि अगर वह किसी स्पोर्ट्स से अगर जुड़े होते, तो संभवत आज रेलवे उन्हें कई तरह के सम्मान और पद का ऑफर देते. शिक्षा की इतनी डिग्रियां मिलने और रेलवे स्टेशन पर वेंडर्स को एजुकेट करने के बावजूद भी अभी तक रेलवे ने उन्हें कोई सम्मान नहीं दिया है.
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